गिद्दड़बाहा पंचायत चुनाव विवाद: कांग्रेस नेताओं की EC से मुलाकात, धरना जारी!

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पंजाब के मुक्तसर जिले के विधानसभा हलका गिद्दड़बाहा में चल रहे पंचायती चुनावों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और गिद्दड़बाहा के पूर्व विधायक, साथ ही लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते हुए हाईवे पर धरना दिया। उन्होंने इस धरने के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया। कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल निर्वाचन आयोग से भी मिला है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि जानबूझकर उनके कई उम्मीदवारों के नामांकन खारिज किए गए हैं, और यह सब सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के इशारों पर हुआ है।

गिद्दड़बाहा में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एसडीएम कार्यालय के समक्ष फिर से धरना शुरू कर दिया है। पिछले 25 घंटे से चल रहे इस आंदोलन में राजा वडिंग ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई है। उन्होंने पूरे दिन और रात हाईवे पर रहकर प्रदर्शन किया, साथ ही रात के समय लाइव होकर लोगों से अपील की कि वे एसडीएम कार्यालय में पहुंचें। राजा वडिंग ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से वे चुनावी दस्तावेजों की छानबीन कर रहे थे, जिस दौरान उन्हें प्रशासन द्वारा बार-बार परेशान किया गया। उन्होंने बताया कि प्रशासन को लगातार reassurance दिया गया था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा और चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए जाएंगे, लेकिन अंततः यह सब कुछ अचानक बदल गया।

राजा वडिंग ने इस स्थिति का मुख्य कारण मुख्यमंत्री भगवंत मान के फोन को बताया। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री के आदेश पर अधिकारियों ने लगभग 29 लोगों के नामांकन रद्द कर दिए और कुछ को बिना किसी मुकाबले के विजयी घोषित कर दिया। वडिंग का कहना है कि गिद्दड़बाहा में पहले इस तरह की कार्रवाई नहीं होती थी, और यह सब नए सत्ताधारियों के सत्ता के लाभ उठाने की योजना के तहत किया गया है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मनप्रीत बादल के समय में भी इस तरह की धांधली होती थी, लेकिन अब यह नया गठबंधन उसी पुरानी प्रक्रिया को अपनाने लगा है।

राजा वडिंग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वे चाहते, तो केवल एक घंटे धरना देकर चले जाते, लेकिन ऐसा करना उनके लिए एक विचारहीनता होती। उन्होंने कहा कि यह लोग ही हैं जिन्होंने उन्हें तीन बार जीत दिलाने में मदद की है और वे हर स्थिति में अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहेंगे। उनकी प्रतिबद्धता और संघर्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह गिद्दड़बाहा क्षेत्र में हो रही अनियमितताओं के खिलाफ अंत तक लड़ाई जारी रखेंगे।

इस पूरे प्रकरण में, कांग्रेस के नेता अपनी बातों को मजबूती से रख रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति और भी मजबूत हो रही है। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग करते हुए उनका यह आंदोलन किसी भी राजनीतिक दल के लिए एक संकेत है कि उन्हें अपने कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की भावना का ध्यान रखना होगा।