बालाघाटः नक्सल सुरक्षा, पर्यटन और व्यापार का दक्षिण द्वार हुआ तैयार
– घने जंगल में सर्पीली सड़क सैलानियों को कराएगी वादियों की सैर
– महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ की कान्हा राष्ट्रीय टाइगर पार्क की कम हुई दूरी
बालाघाट, 06 अक्टूबर (हि.स.)। आज से पहले भी सड़कें बनी हैं और आगे भी बनती रहेंगी, लेकिन मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में इस बारिश से पहले एक ऐसी सड़क बनकर तैयार हुई, जो नक्सल सुरक्षा और पर्यटन की दृष्टि से अनुपम है। यह सड़क जंगल में रहने वाले आदिवासियों के लिए जीवन रेखा के समान है। इस सड़क से नक्सल से सुरक्षा में पुलिस को बड़ी मदद तो मिलना तय ताे है ही, इससे ज्यादा पर्यटन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार को भी नया आयाम मिला है। इस सड़क निर्माण के लिए पुलिस द्वारा आरसीपीएलडब्ल्यूईए से प्रस्ताव तैयार किया गया। इस सड़क की एक खूबी यह भी है कि इस सड़क ने जिले के उत्तरी क्षेत्र बैहर को दक्षिण क्षेत्र यानी किरनापुर, लांजी को सीधे जोड़ दिया है। इस लिहाज से इसे जिले का दक्षिण द्वार कहा जाने लगा है। इस द्वार से गोंदिया, दुर्ग और राजनांदगांव सीधे तौर पर हद में आ गया है। यह सड़क दो विधानसभाओं को आपस में जोड़ती है। बैहर विधानसभा के हर्रानाला से प्रारम्भ होकर खड़ी पहाड़ी व अत्यंत दुर्गम जंगल के बीच से 16 किमी. की दूरी तय करते हुए लांजी विधानसभा के दुगलई पहुँचती है।
चुनौती भरा रहा निर्माण, 1200 मीटर में 8 शार्प टर्न-
एमपीआरआरडीए के सहायक प्रबंधक एसके शर्मा ने रविवार को बताया कि आरसीपीएलडब्ल्यूईए मद से निर्मित 16 किमी. की यह सड़क बड़ी कठिन रही है। इस मार्ग में एक बड़ी और खड़ी चढ़ाई को तोड़ना इतना आसान नही था। इस मार्ग में 1200 मीटर में ही 8 शार्प टर्न हैं। यहां से गुजरने वाले लोगों को सूझबूझ से काम लेना होगा।
तीन प्राकृतिक झरनों और नेशनल पार्क आपस में जुड़ जाएंगे-
यह सड़क महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ के पर्यटकों के लिए सीधा संपर्क कान्हा टाइगर नेशनल पार्क के अलावा गोदरी, घोघरा और देवनदी के झरने से जुड़ जाएगा। एमपीआरआरडीए के महाप्रबंधक गजेंद्र लारिया ने बताया कि सड़क निर्माण से पूर्व दुगलई, भगतपुर और दो राज्यों के पर्यटकों को बैहर जाने के लिए बालाघाट की ओर से जाना पड़ता था, जो लगभग 80 किमी. दूर है। दुगलई के लोगों को अपनी ही पंचायत बिठली जाने के लिए 5.50 कोस चलकर जाना पड़ता था या फिर 80 किमी. बालाघाट की ओर से घूमकर जाना मजबूरी थी। करीब 11 करोड़ की लागत से बनी सड़क जिले का दक्षिण द्वार है, जो बैहर से लांजी, किरनापुर व अन्य क्षेत्र को जोड़ रही है।
ग्राम पंचायत बिठली की सरपंच मालती उइके का कहना है कि यह सड़क इतनी महत्वपूर्ण है कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य और राशन दुकानों को आपस में जोड़ रही है। साथ ही आसपास के लोगों की पहुँच किरनापुर हाट बाजार में भी आसानी हो गई है। गाड़ियां चलने से रोजगार और व्यापार भी बढ़ने लगा है।
सड़क का जनसांख्यिकी महत्व-
जब इस सड़क से सीधे तौर पर लाभान्वित होने वाले लोगों की जानकारी बटोरी गई तो पता चला कि स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन दुकानों तक पहुँचने में इस सड़क ने एक दर्जन से अधिक गांवों को सहूलियत दी है। इस सड़क से बिठली, हर्रानाला, लूद, सारद, पाथरी, आमानाला, बमनी, कोंगेवानी, हर्राटोला, मंडवा, माड़ी, डोंगरिया, लातरी, कुर्रेझोडी, जालदा, लिमोटी, नवही, हिर्री, भिररी और नारंगी गांवों के लोगों का संपर्क होने लगा है। इस सड़क से बिठली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा उप स्वास्थ्य केंद्र लूद, लातरी, आमानाला और लिमोटी के मरीज आसानी से पहुँचने लगे हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों पर मासिक ओपीडी 1200 से अधिक है। साथ ही बिठली, लातरी, पाथरी, नवही, कोंगेवानी, हर्रानाला और गोदरी के 10824 राशन कार्ड धारी इस सड़क का उपयोग करने लगे हैं। इसके अलावा करीब 150 स्कूली विधार्थियों के लिए यह सड़क उपयोगी हो रही है।
क्या कहते हैं उपयोग करने वाले नागरिक?
आमानाला के माध्यमिक विद्यालय में करीब पांच वर्षों से कार्यरत प्रधान पाठक कौशल पटेले का मानना है कि इस कठिन चढ़ाई के बाद इस मार्ग का उपयोग कई तरह के लोग कर रहे हैं। साथ ही 8 किमी के दायरे में चार स्कूल, दो आंगनबाड़ी आपस में जुड़ गए हैं। अब भयमुक्त होकर आना जाना हो पा रहा है। आमानाला के ही किसान यशवंत धुर्वे कहते हैं कि व्यापारी इस मार्ग से उनके घरों से ही पिहरी झाड़ू जैसी कई सामग्री खरीदने पहुँचने लगे हैं। पहले उन्हें बिठली, हट्टा या गोदरी जाकर बेचना पड़ता था। अब घर बैठे रुपये मिल जाते हैं। कई लोग दुकानें भी लगाने लगे हैं। इसी तरह हर्रानाला की सुशीला पन्द्रे, कौशल उइके और दीनू भलावी को इस मार्ग के बनने से राशन व स्वास्थ्य में बड़ी सुविधा मिली है।
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