पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ किसी भी निरोधात्मक कार्रवाई पर अगले आदेश तक रोक
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को अंतरिम राहत दी है। जस्टिस हृषिकेश राय की अध्यक्षता वाली बेंच ने अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ अगले आदेश तक किसी भी निरोधात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर 5 नवंबर को अगली सुनवाई करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान होता है। संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत पत्रकारों के अधिकारों को सुरक्षा मिली हुई है। किसी पत्रकार के लेख में सरकार की आलोचना समझकर उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं करना चाहिए।
अभिषेक उपाध्याय के आलेख ‘यादव राज बनाम ठाकुर राज’ के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई है। उनके एक्स पर किए गए पोस्ट को विपक्ष के नेता अखिलेश यादव ने अपने एक्स हैंडल से शेयर किया, जिसके बाद ये चर्चा का विषय बन गया। उपाध्याय की याचिका में कहा गया है कि उन्होंने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। याचिका में संबंधित एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई है ताकि उनकी पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
याचिका में कहा गया है कि अभिषेक उपाध्याय के एक्स पर पोस्ट के जवाब में उत्तर प्रदेश पुलिस के आधिकारिक एक्स हैंडल से कानूनी कार्रवाई की धमकी मिल रही है। याचिका में कहा गया है कि उन्हें लगातार गिरफ्तारी और मुठभेड़ में मारने की धमकियां मिल रही हैं।
अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ एक स्वतंत्र पत्रकार पंकज कुमार ने लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। एफआईआर में अभिषेक उपाध्याय के अलावा पत्रकार ममता त्रिपाठी को भी आरोपित किया गया है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 352(2), 197(1)(सी), 302, 356(2) और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत एफआईआर दर्ज की गयी है। एफआईआर में कहा गया है कि अभिषेक उपाध्याय ने अपने लेख को एक्स हैंडल पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की छवि को खराब करने की कोशिश की है। उनके लेख से समाज में वैमनस्य, शत्रुता और राष्ट्रीय अखंडता को खतरा है।
—————