पंजाब के मुक्तसर जिले में मंगलवार को सरकारी कॉलेजों के गेस्ट फैकल्टी लेक्चररों ने अपनी मांगों को लेकर एक जोशीला धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल लेक्चररों ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाते हुए अपने हक की आवाज उठाई। इन शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है और उनकी मेहनत की उचित कद्र नहीं की जा रही। वक्ताओं ने यह भी कहा कि लंबे समय से सरकारी कॉलेजों में नियमित प्रोफेसरों की भर्ती नहीं हुई है, जिसके चलते शिक्षण व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकारी कॉलेजों में छात्रों की पढ़ाई के लिए गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसरों को भर्ती किया गया है। इन सहायक प्रोफेसरों ने नियमित प्रोफेसरों की तरह अपनी जिम्मेदारियों को निभाया है, लेकिन सरकार ने अपने वादों को पूरा नहीं किया है। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के दस्तावेजों में गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसरों को हमेशा अस्थायी रूप से संबोधित किया जाता रहा है, और इन्हें उचित वेतन के बजाय केवल एक मामूली भत्ता दिया जा रहा है। यह स्थिति शिक्षकों के साथ अन्याय का प्रतीक है।
गेस्ट फैकल्टी लेक्चररों ने दु:ख प्रकट किया कि आम आदमी पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें आश्वासन दिया था कि उनकी नौकरी को सुरक्षित किया जाएगा और उन्हें समाज में वह सम्मान प्राप्त होगा, जो किसी शिक्षक का होना चाहिए। लेकिन अब तक इस तरह के कोई ठोस कदम उठाए नहीं गए हैं। इस धरने में उपस्थित भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजेश गोरा पठेला, संदीप गिरधर तथा अनुराग शर्मा जैसे नेता भी शामिल हुए, जिन्होंने लेक्चररों के आंदोलन को समर्थन दिया।
किसान संगठनों के नेताओं ने भी इस मौके पर गेस्ट फैकल्टी लेक्चररों की सहायता हेतु अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। किसान नेता निर्मल सिंह जस्सेआणा, हरदयाल सिंह, हरजिंदर सिंह थांदेवाला तथा हरभगवान सिंह सक्कांवाली जैसे प्रमुख नेता इस धरने में शामिल हुए और समर्थन देने के लिए उपस्थित रहे। गेस्ट फैकल्टी लेक्चररों ने भाजपा नेता राजेश गोरा पठेला को अपनी मांगों के संबंध में एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्हें आश्वासन दिया गया कि उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाएगा।
यह धरना न केवल गेस्ट फैकल्टी लेक्चररों की समस्या का एक महत्वपूर्ण अंकन है, बल्कि यह महत्वपूर्ण सवाल भी उठाता है कि शिक्षा के क्षेत्र में भर्ती प्रक्रियाओं को उचित और पारदर्शी तरीके से कैसे सुधार किया जा सकता है। शिक्षकों के इस आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि शिक्षण प्रणाली को सशक्त नहीं किया गया तो छात्रों के भविष्य पर इसका नकारात्मक असर होगा। शिक्षकों की मांगों को सुनना और उन पर उचित कार्रवाई करना सरकार की जिम्मेदारी बनता है, ताकि गुणवत्ता वाली शिक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।