पंजाब के फिरोजपुर में पंचायत चुनाव के दौरान अराजकता का माहौल उत्पन्न हो गया है। सोमवार को यहां सत्ताधारी दल पर गोलियों चलाने का आरोप लग रहा है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान ऐसी घटनाओं की जानकारी मिलने पर विपक्ष ने सत्ताधारी दल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता खुलेआम हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, जबकि पुलिस केवल मूक दर्शक बनी हुई है।
सोमवार की शाम को फिरोजपुर के शहरी इलाके में सत्ताधारी दल के समर्थकों पर गोलियां चलाने का आरोप लगा, जबकि मंगलवार को जीरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस जिला प्रधान और पूर्व विधायक कुलबीर सिंह जीरा खून से लथपथ पाए गए। जीरा ने दावा किया कि उन्हें और उनके समर्थकों को पंचायत चुनाव में नामांकन पत्र जमा करने से रोका गया। उन्होंने अपनी सुरक्षा में चूक के लिए स्थानीय डीएसपी पर आरोप लगाया और कहा कि इस संबंध में उन्होंने उच्च अधिकारियों को भी शिकायत की है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने आक्रोशित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हवाई फायरिंग की। जीरा के क्लॉक टॉवर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फिरोजपुर के हेडक्वार्टर से बड़ी संख्या में पुलिस बल को बुलाया गया है। हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और प्रशासन ने मौके पर कई बड़े अधिकारियों को भी तैनात किया है।
कुलबीर सिंह जीरा ने यह भी कहा कि वह अपने लोगों के साथ नामांकन करने के लिए आए थे, लेकिन उन्हें सत्ताधारी दल के लोगों की हिंसा का सामना करना पड़ा, जिसमें वह स्वयं घायल हुए। उनके समर्थकों ने इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर उतरने का निर्णय लिया। इस दौरान कुछ वाहनों में तोड़फोड़ की गई, जिसका संबंध अभी तक किसी विशेष राजनीतिक दल से नहीं जोड़ा जा सका।
पंजाब में चुनावी माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और यह स्थिति लोगों के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में प्रशासन को तुरंत कदम उठाकर शांति व्यवस्था बहाल करने की आवश्यकता है। सभी दलों को इस तरह की हिंसा से दूर रहकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए, ताकि चुनावी माहौल स्वच्छ एवं शांतिपूर्ण बना रहे। नागरिकों की सुरक्षा सबसे प्राथमिकता होनी चाहिए और चुनावी प्रक्रिया को सही तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी स्तर पर प्रयास किए जाने चाहिए।