चंडीगढ़: क्लब रिसॉर्ट हॉस्पिटैलिटी को उपभोक्ता की शिकायत पर 80 हजार रु. ब्याज सहित लौटाने का आदेश

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चंडीगढ़ के उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने क्लब रिसॉर्ट हॉस्पिटैलिटी को एक महत्वपूर्ण निर्णय में 80,000 रुपए की राशि वापस करने का आदेश दिया है। फोरम ने यह आदेश उस समय दिया जब क्लब ने एक परिवार की लग्जरी हॉलिडे पैकेज (एलएचपी) की सदस्यता रद्द करने के अनुरोध को अनसुना कर दिया था। शिकायतकर्ताओं ने 2019 में इस सदस्यता के लिए भुगतान किया था, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने इसे रद्द करने का आग्रह किया, जिसे क्लब ने नहीं माना। इस आधार पर, फोरम ने उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा करते हुए क्लब के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उन्हें 17 नवंबर, 2019 को क्लब रिसॉर्ट हॉस्पिटैलिटी के प्रतिनिधियों ने चंडीगढ़ के होटल जेम्स प्लाजा में एक बैठक के लिए बुलाया था, जहां उन्होंने पांच साल की सदस्यता के लिए 80,000 रुपए का भुगतान करने पर सहमति जताई। इस पैकेज में अगले पांच वर्षों के लिए वार्षिक शुल्क के रूप में 9,999 रुपए भी शामिल थे। लेकिन, केवल एक दिन बाद, 18 नवंबर को, उन्होंने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए क्लब को ईमेल और कूरियर के माध्यम से सदस्यता रद्द करने और धन की वापसी का अनुरोध किया। क्लब ने 19 नवंबर को जवाब दिया, जिसमें कहा गया कि उनका मामला संबंधित टीम को पास कर दिया गया है, लेकिन वास्तव में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करवाने के बाद, फोरम ने देखा कि क्लब ने शिकायतकर्ताओं के अनुरोध को नजरअंदाज किया है। शिकायतकर्ताओं ने 28 नवंबर, 2019 को पुनः एक पत्र भेजा, जिसके बाद क्लब ने 20 दिसंबर को अवैध रूप से उनकी सदस्यता को मंजूरी दे दी। इसके उपरांत, शिकायतकर्ताओं ने 1 जनवरी, 2020 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके इस क्रम में, उपभोक्ता फोरम के समक्ष तर्क रखा गया कि क्लब ने समझौते के खंड 7 के तहत तय 10 दिनों की समय सीमा में सदस्यता रद्द करने में असफलता दिखाई, जो किसी प्रकार की सेवा में कमी और अनैतिक व्यापार प्रथाओं के रूप में देखा जा सकता है।

अंततः, उपभोक्ता फोरम ने शिकायतकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए क्लब रिसॉर्ट हॉस्पिटैलिटी को 80,000 रुपए की राशि 6% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया। फोरम ने क्लब को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि उन्हें यह राशि 60 दिनों के भीतर वापस करनी होगी। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि उपभोक्ताओं की मांगों पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उन्हें कोई अन्याय नहीं सहना पड़ेगा। इस निर्णय से अन्य उपभोक्ताओं को भी प्रेरणा मिलती है कि वे अपने हक की लड़ाई लड़ें और आवश्यकतानुसार उपभोक्ता फोरम का सहारा लें।