शिअद बागी नेता वडाला की चेतावनी: अकाल तख्त कमेटी में राजनीति बंद करें!

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जालंधर में हाल ही में हुई एक प्रेस वार्ता में अकाली दल से टूटकर निकले नेताओं ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार द्वारा बीबी जागीर कौर को भेजे गए नोटिस पर अपनी चिंता व्यक्त की। बीबी जागीर कौर, जो कि पूर्व शिरोमणि कमेटी की अध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं, को तख्त पर अपने स्पष्टीकरण के लिए बुलाया गया है। इस घटनाक्रम पर पूर्व विधायक और जत्थेदार रहे गुरप्रताप सिंह वडाला ने एक स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त साहिब जैसी सम्मानित संस्था में किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों का स्थान नहीं होना चाहिए।

गुरप्रताप वडाला ने इस मुद्दे पर गहराई से विचार करते हुए कहा कि सिखों का सबसे महत्वपूर्ण पंथ श्री अकाल तख्त साहिब है और इसे किसी प्रकार की पक्षपात से मुक्त रखा जाना चाहिए। उन्होंने बीबी जागीर कौर की सिख समुदाय के प्रति की गई सेवाओं और बलिदानों का उल्लेख किया। वडाला ने कहा कि बीबी जागीर कौर ने ऐसे वक्त में सिखों की सेवा की है जब उन्हें दो बार कोर्ट से बरी किया गया है, जिससे उनकी निष्ठा और धर्म के प्रति प्रतिबद्धता साबित होती है।

वडा ने बताया कि बीबी जागीर कौर को 2018 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक हत्या के मामले में बरी किया था। इसके बाद उन्होंने 2019 में खडूर साहिब से लोकसभा चुनाव लड़ा और उस चुनाव में बिना किसी आधिकारिक विरोध के उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अध्यक्षता ग्रहण की। जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनके खिलाफ उठाए गए ये मुद्दे केवल राजनीति से प्रेरित हैं। वडाला ने यहाँ पर यह भी कहा कि इस नोटिस का उद्देश्य आगामी एसजीपीसी चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीबी जागीर कौर को कमजोर करना है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हत्यारों से संबंधित शब्द केवल भ्रूण हत्या और नवजात कन्याओं की हत्या के संदर्भ में उपयोग किया जाना चाहिए। बीबी जागीर कौर ने अपनी बेटी को जन्म दिया है और उसे अच्छे से पालने का अपना दायित्व पूरी तरह से निभाया है। उनका कहना है कि किसी को भी इस प्रकार के कठोर आरोपों से पीड़ित नहीं होना चाहिए, खासकर जब उसके पास इसके विरोध में कानूनी सबूत मौजूद हैं।

इस सभी घटनाओं ने एक बार फिर से सिख समुदाय के भीतर राजनीति और धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। निरंतर यह चिंता बनी हुई है कि राजनीतिज्ञ अपने स्वार्थ के लिए धार्मिक संस्थानों का किस प्रकार उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि सिख समुदाय के प्रति जितने भी प्रयास किए जा रहे हैं, उसमें ईमानदारी और निष्पक्षता का पालन किया जाए।