अमृतसर में आज किसानों का विरोध प्रदर्शन दोपहर 1 बजे से डीसी ऑफिस के बाहर शुरू होने वाला है। यह मार्च किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसमें किसानों के मुआवजे और सरकारी नौकरियों की मांग को लेकर अपना विरोध प्रकट किया जाएगा। संगठन के राज्य नेता सरवन सिंह पंधेर और जिला अध्यक्ष रणजीत सिंह कलेर बाला ने जानकारी दी कि वेडी सभी आवश्यक तैयारियों का जायजा लेने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी नीतियों के तहत घायल हुए किसानों को न केवल नौकरी दी जानी चाहिए, बल्कि उन्हें 5000 रुपए का मुआवजा भी मिलना चाहिए।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेताओं ने यह भी बताया कि शंभू बॉर्डर पर समस्याओं का सामना करते हुए कुछ बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिसमें भारत माला प्रोजेक्ट के तहत सड़कों पर बिना किसी भुगतान के अतिक्रमण का मुद्दा, पराली जलाने की समस्या, रेड एंट्री की समस्या को दूर करने, पूर्ण नशा बंदी और आवारा पशुओं की समस्या का समाधान शामिल है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को सुलझाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने स्तर गांव में बैठकें आयोजित की हैं, जिससे लोगों को एकजुट किया जा सके।
संगठन के नेताओं ने बताया कि इन समस्याओं के समाधान के लिए लोगों में काफ़ी गुस्सा और असंतोष है। उनके अनुसार, आज का धरना शांतिपूर्ण तरीके से और सिर्फ अपनी जायज मांगों के लिए किया जाएगा। इस व्यवस्था में अगर प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वह 25 सितंबर को देवीदास पुरा रेल फाटक पर रेल रोको मार्च करने का इरादा रखते हैं। उनका यह निर्णय प्रशासन को चेतावनी देने के लिए है कि यदि उनकी अपेक्षाओं को नजरअंदाज किया गया, तो वे और अधिक कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
किसानों का यह विरोध प्रदर्शन न केवल अमृतसर में बल्कि पूरे पंजाब में कृषि मुद्दों को लेकर एक महत्वपूर्ण गोलबंदी का प्रतीक है। किसान संगठन इस बात को लेकर आश्वस्त है कि उनकी आवाज का असर प्रशासन पर जरूर होगा। उन्होंने अपने प्रदर्शन को मजबूत समर्थन देने के लिए अन्य किसानों और कृषि संगठनों से भी अपील की है कि वे इस आंदोलन में शामिल हों और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट हो कर आवाज उठाएं।
इस प्रकार, आज का यह विरोध प्रदर्शन किसानों की समस्याओं को उजागर करेगा और सरकार को उनकी जायज मांगों की तरफ ध्यान आकृष्ट करेगा। यदि प्रशासन समस्याओं का समाधान करने में गंभीरता नहीं दिखाता है, तो किसान संगठनों द्वारा भविष्य में और भी बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है।