मंदिर के भूमि विवाद में हनुमान जी को बनाया सह वादी, हाई कोर्ट ने ठोंका एक लाख जुर्माना

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नई दिल्ली, 07 मई (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक निजी भूमि पर कब्जे के संबंध में हनुमान जी को सह वादी बनाने पर याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। जस्टिस सी हरिशंकर की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका खारिज करते हुए जुर्माना लगाने का आदेश दिया।

यह मामला उत्तम नगर की जैन कालोनी, पार्ट वन की एक संपत्ति का है। याचिकाकर्ता ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि संपत्ति पर एक सार्वजनिक मंदिर है, इसलिए जमीन हनुमान जी की है। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के समक्ष हनुमान जी के निकट मित्र और उपासक के रूप में याचिका दायर की है। हाई कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने संपत्ति को कब्जाने के इरादे से साजिश रची और जमीन के मौजूदा कब्जाधारकों से साथ मिलीभगत की, ताकि प्रतिवादी पक्ष को मुकदमे के बाद दोबारा कब्जा हासिल करने से रोका जा सके।

कोर्ट ने पाया कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट के प्रतिवादियों ने जमीन खाली करने के लिए 11 लाख रुपये मांगे थे और ट्रायल कोर्ट के याचिकाकर्ता ने छह लाख रुपये का भुगतान भी किया। इसके बावजूद प्रतिवादियों ने जमीन खाली नहीं की। इस मामले में प्रतिवादी ही मौजूदा कब्जाधारक हैं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता ने ये कहते हुए आपत्ति दर्ज कराई की जमीन पर हनुमान जी का सार्वजनिक मंदिर है और इसलिए वह भूमि हनुमान जी की है। याचिकाकर्ता ने कहा कि हनुमान जी के उपासक होने के नाते उसे भगवान का निकट मित्र होने के नाते उनके हित की रक्षा करने का अधिकार है। याचिकाकर्ता इस मामले में न तो ट्रायल कोर्ट का वादी है और न ही प्रतिवादी, बल्कि वो तीसरा पक्ष है।

कोर्ट ने कहा कि जनता के पास निजी मंदिर में पूजा करने का कोई अधिकार नहीं है, जब तक कि मंदिर का मालिक ऐसा उपलब्ध नहीं कराता या समय बीतने के साथ निजी मंदिर सार्वजनिक मंदिर में बदल नहीं जाता है।