छात्रों को जीवन में नैतिकता को बनाए रखना बेहद जरूरीः प्रोफेसर सोमदेव

Share

हरिद्वार, 29 फ़रवरी (हि.स.)। भेषज विज्ञान विभाग में रोगों के उपचार, निदान एवं जांच आदि में प्रयुक्त होने वाली इमेजिंग तकनीकियों के उपयोग पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ गुरुकुल कांगड़ी विश्व विद्यालय में किया गया।

इस अवसर पर डॉ रविकांत शर्मा, रामानंद इंस्टीट्यूट आफ फार्मेसी एंड मैनेजमेंट के प्रबंधक एवं निदेशक डॉ वैभव शर्मा, गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमदेव शतांशु एवं भेषज विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डीएस मलिक तथा विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ आर्य कॉलेज आफ फार्मेसी, बरेली, राजा बलवंत सिंह कॉलेज ऑफ फार्मेसी, आगरा, गुरु नानक इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, देहरादून के छात्र- छात्राओं के साथ साथ अन्य शोधार्थी उपस्थित हुए।

इस दौरान कुलपति प्रोफेसर सोमदेव शतांशु ने बताया कि प्राचीन काल से ही वैदिक ज्ञान की समझ रखने वाले ऋषि-मुनि अपने अनुभव के आधार पर रोगों की जांच एवं निदान आदि किया करते थे। उस समय आज की तरह उपकरण न होने के बावजूद भी जड़ी बूटियां के द्वारा एवं योग की विभिन्न विधाओं के द्वारा रोगों का उपचार किया जाता था। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में अनुशासन,लक्ष्य की और एकाग्रता तथा कठिन परिश्रम से ही अपने उद्देश्य की ओर बढ़ा जा सकता है। इसके साथ-साथ छात्रों को जीवन में नैतिकता को बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। मुख्य अतिथि प्रोफेसर ईश्वर भारद्वाज ने छात्रों को जीवन में वैदिक दिनचर्या को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

प्रोफेसर मलिक ने बताया कि इमेजिंग टूल्स का उपयोग रोगों में ही नहीं अपितु पर्यावरण की विभिन्न समस्याओं के समाधान इत्यादि में भी किया जाता है। आज के समय में बदलती हुई जीवन शैली एवं खाद्य पदार्थों में विभिन्न रसायन इत्यादि का उपयोग किया जाता है, उनके लिए भी आधुनिक तकनीक उपयोग में लाकर उनकी जांच एवं निदान किया जा सकता है।

कार्यशाला में प्रथम दिन के वक्त डॉ. रविकांत शर्मा ने कहा कि लोगों की जांच एवं उनके उपचार आदि में पैथोलॉजी की जांच का अपना अलग ही महत्व ह। आज ऐसी नई तकनीकी आ गई है जिसके द्वारा पैथोलॉजी की जांच बड़ी आसानी से की जा सकती है, जिसमें रक्त, मल मूत्र इत्यादि की जांच के द्वारा विभिन्न रोगों का बड़ी आसानी से पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छात्र आने वाले समय में इस क्षेत्र में भी नए रोजगार के अवसर ढूंढ सकते हैं। भारत सरकार भी आज के समय मोबाइल पैथोलॉजी लैब देश के विभिन्न हिस्सों में संचालित करने जा रही है जिसमें फार्मा के छात्रों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार ने कार्यशाला में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यशाला में सत्र के दौरान बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, बनारस के डॉ विनोद तिवारी ने कैंसर की जांच, उसके निदान एवं उसके उपचार हेतु नई दावों के अनुसंधान में उपयोग होने वाली तकनीकियों जैसे इलेक्ट्रोफॉरेसिस, वेस्टर्न ब्लॉट, सादर्न ब्लॉट इत्यादि के बारे में छात्रों को जानकारी उपलब्ध कराई।

इस कार्यक्रम के दौरान विभाग के शिक्षक डॉ. कपिल कुमार गोयल, डॉ. विनोद नौटियाल, प्रोफेसर सतेंद्र राजपूत, राहुल सिंह, तरुण कुमार, रोहित भारद्वाज, बलवंत सिंह रावत, राघव दीक्षित, डॉ. रवि प्रताप, राजेंद्र यादव, डॉ. प्रिंस प्रशान्त शर्मा, दीपक नेगी इत्यादि उपस्थित रहे। इसके साथ-साथ विभाग के कर्मचारी डॉक्टर रोशन लाल हरेंद्र मलिक, मनोज कुमार, डॉ गौरव भिंडर, नितिन कुमार, संजीव मिश्रा, मनजीत कुमार, नरेश त्यागी इत्यादि का भी योगदान रहा।