मकान ढह जाने से झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं दंपति,पति हो चुका है विकलांग

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– 20 वर्षों से नहीं मिला आवास, हर बार ग्राम प्रधान देते हैं आश्वासन

– कई बार प्रशासनिक अधिकारियों व राजनेताओं को भी लिखित रूप से दम्पति दें चुके हैं प्रार्थना पत्र

औरैया, 02 जनवरी (हि. स.)। जनपद के कंचौसी सब्जी मंडी के रेलवे स्टेशन के समीप रहने वाले ब्रजेश सक्सेना उर्फ बूली व उनकी पत्नी ललिता देवी का बरसात के कारण कच्चा मकान ढह गया। जिससे दम्पति झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। ललिता देवी का कहना है कि पिछले कई वर्षों से तीन प्रधानों से आवास के लिए कह चुकी हैं व शासन स्तर पर भी कई बार लिखित प्रार्थना पत्र दिया, परन्तु कोई सुनवाई नहीं हुई।

जबकि पक्के मकानों में रहने वालों को आवास आवंटित कर दिए गए।इधर पति का स्वास्थ्य अब ठीक नहीं है वो बीमारी की वजह से विकलांग हो चुके हैं। इस स्थिति में वो कहीं आ जा भी नहीं सकते। मकान की कच्ची दीवाल पिछली बरसात में ढह गई।

उल्लेखनीय है कि बूली सक्सेना व उनकी पत्नी रेलवे के समीप ही एक पान की गुमटी रखकर अपने बच्चों व परिवार का भरण पोषण करते हैं। बूली की पत्नी ललिता आगे बताती हैं कि पति की बीमारी व विकलांगता की वजह से पूरे परिवार व बच्चों की पढ़ाई रोजमर्रा की जरूरतों,परिवार का पूरा भरण पोषण इतनी महँगाई में बमुश्किल से हो पाता है। ऊपर से रहने के लिए छत भी नहीं है। उन्होंने वर्तमान ढिकियापुर प्रधान पर भी अपने चहेतों को विकलांग कोटे से हाल ही में आवंटित हुए आवास दिलाने का आरोप लगाया है। ब्रजेश सक्सेना का कहना है कि विकलांग प्रमाणपत्र होनेके बावजूद भी उनको आवास नहीं मिला,जिले के उच्चाधिकारियों व प्रशासन से उनको आवास देने की मांग की है! बूली सक्सेना कहते हैं यदि हर बार उन्हें आवासीय योजना के अंतर्गत आवास नहीं मिला तो वह जल्द ही अम्बेडकर पार्क कंचौसी में इस बाबत भूख हड़ताल पर बैठकर प्रशासन से आवास की मांग करने को बाध्य होंगे।