सिवनीः एनसीएस की तीन सदस्यीय टीम पहुंची सिवनी, कहा अच्छी डिजाईन के घर बनाये डरने की जरूरत बिल्कुल भी नही

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13HREG442 सिवनीः एनसीएस की तीन सदस्यीय टीम पहुंची सिवनी, कहा अच्छी डिजाईन के घर बनाये डरने की जरूरत बिल्कुल भी नही

सिवनी, 13 अक्टूबर(हि.स.)। जिला मुख्यालय कलेक्टर सभाकक्ष में शुक्रवार की दोपहर को राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केन्द्र ,पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा अधिकृत तीन सदस्यीय दल जिले के पत्रकारों से रूबरू हुये और इस दौरान उन्होनें बीते वर्षो से जिले में आ रहे भूंकप से संबंधित जानकारी साझा की और जिले की जनता से कहा कि दरारे है छोटे-छोटे मध्यम भूंकप आयेंगें। आपको अच्छी डिजाईन के घर बनाने है जिससे डरने की जरूरत बिल्कुल भी नही है। यह हल्के मध्यम के भूंकप आते रहेगें और ये कुछ समय बाद राब की क्षमता खत्म हो जायेगी तो ये स्वतः ही आना बंद हो जायेगें। भू वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह भूकंप का ब्लास्टिग और क्रेशर से कोई संबंध नही है।

भू वैज्ञानिक डॉ. संजय प्रजापति ने बताया कि सिवनी क्षेत्र में जो भूंकप महसूस किये जा रहे है जिसका श्रेय स्थानीय क्रस्टल समायोजन को दिया जा सकता है। सिवनी जिला सेसमिक जोन 3 में आता है पिछले तीन वर्षो से यहां पर मध्यम तीव्रता के भूंकप के झटके महसूस जिलेवासी कर रहे है। इन घटनाओं की जानकारी एकत्र करने के लिए जिले के चार स्थानों क्रमशः सिवनी, धारना कला, कुरई और छपारा में भूंकपमापी यंत्र लगाये गये है। जिसका रियल टाईम मे डाटा राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केन्द्र पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय , भारत सरकार नई दिल्ली में एकत्र किया जा रहा है। पिछले वर्षो में महसूस किये गये भूंकपीय घटना के अध्ययन करने से ज्ञात हुआ है कि सिवनी जिले में दो दरारे है पूर्व से पश्चिम की ओर पास हो रही है और भूंकप का केन्द्र उसी के आसपास है। बम्होडी, आमाझिरिया ग्राम में भूंकप के झटके महसूस किये गये है। जिले में पिछले दस वर्षो के भूंकपीय आंकडे के अनुसार यहां पर 37 भूंकप के झटके महसूस किये गये। जिनकी मिनिमम तीव्रता 1.8 और अधिकतम तीव्रता 4.2 थी। यह भूंकप के झटके वर्ष 2020 से प्रांरभ हुये है। जिले में बीते तीन वर्षो से लगातार आ रहे भूंकप के झटके के संबंध में राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केन्द्र पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय , भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा तीन सदस्यीय दल क्रमशः डॉ. संजय प्रजापति, आशीष जैन , विश्वरंजन ओझा को भेजा गया जिन्होने भूंकपीय घटना वाले क्षेत्रों का भ्रमण कर भूकंपनीय घटना से संबंधित साक्ष्यों को एकत्रित किया। इस दौरान उन्होनें पाया कि उन क्षेत्रों जो दरारे है उनमें तनाव उत्पन्न होता रहता है। बरसात के बाद जब पानी हाइडोफेक्चर में तनाव बढता है जो बरसात के बाद वह तनाव उर्जा के माध्यम से निकलता है जिससे इन क्षेत्रों छोटे-छोटे तीव्रता के भूकंप महसूस किये जाते है। इस तीव्रता के भूंकप आने के कारण जो महसूस होता है। उसे सैडमैप कहते है यहां पर तीव्रता 3 से 4 है। जिनमें हल्के झटके महसूस होगें और घर की दीवारों पर पंखें और कुछ हेडलिंग चीजें लटकेगी। भूकंप का मुख्य कारण दरारों का हाडडोफेक्चर है उसमें पानी का जाना और पानी का निकलना है जिससे राब तनाव में आते है और एनर्जी को रिलीज करते है।

आगे बताया कि यह दरार हजारों वर्षो से है जब यह दरारे अपनी सीमा को क्रास करेगी तब टूटेगी जिसे हम कहते क्रस्टल रि एडजेस्टमेंट। उन्होने जिले की जनता से कहा कि दरारे है छोटे-छोटे मध्यम भूंकप आयेंगें। आपको अच्छी डिजाईन के घर बनाने है जिससे डरने की जरूरत बिल्कुल भी नही है। यह हल्के मध्यम के भूंकप आते रहेगें और ये कुछ समय बाद राब की क्षमता खत्म हो जायेगी तो ये स्वतः ही आना बंद हो जायेगें। भू वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह भूकंप का ब्लास्टिग और क्रेशर से कोई संबंध नही है।