रतलाम: पेटलावद ब्लास्ट: 8 साल में भी जांच रिपोर्ट को विधानसभा में नहीं रखा : सकलेचा

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12HREG290 रतलाम: पेटलावद ब्लास्ट: 8 साल में भी जांच रिपोर्ट को विधानसभा में नहीं रखा : सकलेचा

रतलाम, 12 सितंबर (हि.स.)। पेटलावद ब्लास्ट जांच आयोग के न्यायमूर्ति आर्येन्द्र कुमार सक्सेना का जांच प्रतिवेदन 11 दिसंबर 2015 को मिलने के बाद भी 9 साल मे विधानसभा के पटल पर नहीं रखा गया । जांच आयोग जनता के साथ बहुत बड़ा धोखा है । यह आरोप कांग्रेस के प्रदेश महासचिव तथा रतलाम के पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने लगाया ।

सकलेचा ने कहा की 2008 से 2021 तक 7 जांच आयोग बनाए गए । जिसमें से छ: आयोग की रिपोर्ट, प्राप्त होने के 5 साल से 13 साल के बाद भी विधानसभा के पटल पर नहीं रखी गई । जबकि जांच आयोग अधिनियम की धारा 3(4) के तहत उसे 6 माह के अंदर विधानसभा के पटल पर रखना चाहिए ।

उन्होंने कहा की मंदसौर गोलीकांड की जैन आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में रखने की पिटीशन पर माननीय उच्च न्यायालय इंदौर में शासन ने अपने जवाब में कहा कि जांच आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने , विधानसभा के पटल पर रखने के लिए शासन बाध्य नहीं है । शासन ने मंदसौर गोलीकांड की रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखने से इनकार कर दिया ।

सकलेचा ने आरोप लगाया कि पेटलावद बलास्ट में 79 लोगों की मृत्यु के लिए जिम्मेदार अधिकारी कलेक्टर, एसपी, एसडीएम तथा एसडीओपी को बचाने के लिए जांच आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर नहीं रख रहे हैं । साथ ही अधिकारियों को बचाने के लिए शासन द्वारा न्यायालय में प्रकरण की पैरवी कमजोर तरीके से की गई और सातों आरोपी बरी हो गए ।

सकलेचा ने कहा कि यह बड़ा आश्चर्यजनक है कि पूरे घटनाक्रम में मात्र थाना अधिकारी शिवजी सिंह की रिटायरमेंट के पहले 1600 की एक वेतन वृद्धि रोकी गई, जबकि थाना अधिकारी ने स्पष्ट आरोप लगाया कि उन्हें मोहरा बनाया जा रहा है और कलेक्टर और एसपी को बचाया जा रहा है। सकलेचा ने कहा कि कमलनाथ सरकार बनने के बाद पेटलावद ब्लास्ट और मंदसौर गोलीकांड के सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही की जाएगी।