10HREG361 मुखिया को सभी के लिए एक समान भाव रखना चाहिए: ज्ञानानंदजी महाराज
केशव सत्संग भवन में चल रहे हैं चार्तुमासिक प्रवचन
मन्दसौर 10 जुलाई (हि.स.)। श्री केशव सत्संग भवन खानपुरा में चातुर्मास हेतु ज्ञानानंदजी महाराज हरिद्वार विराजित है। संतश्री द्वारा केशव सत्संग भवन में श्रीमद भागवत कथा के एकादश स्कंद का वाचन किया जा रहा है। सोमवार को धर्म सभा में संतश्री ज्ञानानंदजी महाराज ने बताया ईश्वर के भक्त तीन प्रकार के होते है। उच्च भक्त, मध्यम भक्त और कनिष्ठ भक्त तीनों भक्तों की अपनी – अपनी विशेषताएं होती है। आपने कहा कि कैसें भी भक्त बनो लेकिन ईश्वर की भक्ति जरूर करों यह हमारे जीवन के लिए अति महत्वपूर्ण है।
धर्मसभा में उदाहरणों के माध्यम से संतश्री ने कहा कि मुखिया चाहे परिवार का हो समाज का उसे सभी के लिए समान भाव रखना चाहिए। लेकिन मनुष्य स्वार्थी होता है कई बार स्वार्थ के कारण प्रेम परिवर्तन आ जाता है लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। आपने कहा कि दुष्ट लोगों के साथ न तो मित्रता करना चाहिए और नहीं द्वेषता रखना चाहिए यह घातक होता है ऐसे लोगों की उपेक्षा करना चाहिए। आपने उपदेश देते हुए कहा कि अपने जीवन में सरल और सहज बनों किसी से द्वेषता मत रखों कोई आप से रखें तो भी आप मत रखो।
कोई आप को गाली दें आप उसे नजरअंदाज कर दो
धर्मसभा में संतश्री ने कहा कि कोई आप को गाली दें तो आप उसे नजरअंदाज कर दो। क्योंकि उसके पास देने को कुछ नहीं है। व्यक्ति वह देता है जो उसके बाद पास होता है कोई आपकों गाली दें अपशब्द कहें आप मत लो आप नहीं लोगों तो वो चीज पुनः उसी के पास चली जायेंगी। धर्मसभा के अंत में भगवान नारायण का जाप कर आरती के बाद प्रसाद वितरण कर धर्मसभा का समापन किया गया।
इस अवसर पर केशव सत्संग भवन के अध्यक्ष जगदीशचंद्र सेठिया, सचिव कारूलाल सोनी, मदनलाल गेहलोत, प्रहलाद काबरा, रविन्द्र पाण्डे, प्रद्युमन शर्मा, पं नितिन शर्मा, राधेश्याम गर्ग, इंजिनियर आरसी पाण्डे, आर सी पंवार, राव विजयसिंह, सहित बडी संख्या में महिलाएं पुरूष उपस्थित थे।