17HREG74 दुनिया को भारत की अनुपम भेंट है योग : राजेश शुक्ल
वाराणसी,17 जून (हि.स.)। विश्व योग दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को नमामि गंगे काशी क्षेत्र के सदस्यों ने असिघाट पर योगाभ्यास किया। घाट पर मौजूद लोगों को योग के प्रति जागरूक कर संदेश दिया कि योग मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाता है।
नमामि गंगे के काशी क्षेत्र संयोजक राजेश शुक्ला ने इस कहा कि भारतीय संस्कृति में वेद सनातन वर्णाश्रम धर्म के मूल और सबसे प्राचीन ग्रन्थ हैं। विश्व के सबसे प्राचीन साहित्य वेदों और उपनिषदों में योग की मूल उत्पत्ति का उल्लेख है।
उन्होंने कहा कि योग, भारतीय संस्कृति और दर्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसने विश्वभर में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। प्राचीन भारतीय पद्धति योग की आज पूरे विश्व में पहचान बना चुकी है। भारत आदि काल से ही ऋषि-मुनियों की योग और तप की भूमि रहा है। मगर, आधुनिक योग को भारत ही नहीं बल्कि समूचे विश्व में पुनर्जीवित करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाता है। जिनके सफल प्रयासों ने 21 जून पूरी दुनिया में योग के लिए विख्यात हो गया।
उन्होंने कहा कि योग की ही महिमा है कि योग, ध्यान और मेडिटेशन के नए-नए केंद्र खुलने शुरू हो गये। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का यह सिलसिला तब से अनवरत जारी है और सरकारी व निजी प्रयासों से वृहद रूप ले चुका है।
राजेश शुक्ला ने बताया कि अवसाद, व्यसन, परिवारों में संघर्ष, समुदायों में हिंसा, युद्ध, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय विनाश, योग आज सबका जवाब है। हमें न केवल अपने स्वास्थ्य और मन की शांति के लिए योग करना चाहिए, बल्कि हम वास्तव में मां पृथ्वी पर गहराई से जुड़े, संयुक्त परिवार के रूप में रहें, इसके लिए भी योग जरूरी है। योग समूचे विश्व को भारतीय संस्कृति का परिचय कराता है। हिमालय की गोद में बैठ कर योगी तपस्वियों ने एक अमूल्य धरोहर राष्ट्र और विश्व को दी है। भारतीय संस्कृति की धरोहर योग को आज विश्व के अधिसंख्य देश अपना रहे हैं। कई असाध्य रोग को साधने की क्षमता योग में है।