केरल के रास्ते देश में मानसून दे चुका है दस्तक

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कानपुर, 09 जून (हि.स.)। केरल के रास्ते मानसून देश में दस्तक दे चुका है। मानसून पहुंचने के साथ ही देशभर में बारिश के आसार बनने लगे हैं। वहीं केरल सहित दक्षिणी राज्यों में बारिश शुरू हो चुकी है। इस वर्ष मानसून सामान्य समय से लगभग एक सप्ताह की देरी से भारत में पहुंचा है। यह जानकारी शुक्रवार को सीएसए मौसम वैज्ञानिक डॉ.एस.एन.सुनील पांडे ने दी।

जाने क्या होता है मानसून

मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि मानसून शब्द का जन्म अरबी भाषा मौसिम से हुआ है। इस शब्द की उत्पत्ति अरब के समुद्री व्यापारियों ने की थी। समुद्री व्यापारी समुद्र से चलने वाली हवा को मौसिम करते थे, जिसे बाद में मानसून के रूप में जाना जाने लगा। आम भाषा में मानसून ऐसी हवाएं हैं, जो मौसम के अनुरूप दिशा बदलती हैं। मानसून वह हवा है जो बारिश कराती है। मानसून के आने के बाद बारिश शुरू होती है।

देश में मानसून आने का समय क्या है

प्रो. सुनील पांडे ने बताया कि भारत में मानसून सबसे पहले केरल पहुंचा है। आमतौर पर इसके केरल पहुंचने की तिथि एक जून तक की होती है। हालांकि, इसमें एक-दो सप्ताह की देरी भी देखी गई है। भारत में हिन्द महासागर और अरब सागर की ओर से दक्षिण-पश्चिम तट पर मानसून सबसे पहले पहुंचता है। इसके बाद मानसूनी हवाएं देश के दक्षिण और उत्तर दिशा की ओर बढ़ती हैं।

कितने प्रकार की होती है मानसूनी हवा

मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक देश में दो प्रकार की मानसून हवा होती है। पहला गर्मी का मानसून और दूसरा सर्दी का मानसून। भारत में दोनों मानसून का असर अलग-अलग समय में रहता है। भारत में गर्मी का मानसून अप्रैल से सितंबर तक रहता है और सर्दी का मानसून अक्टूबर से मार्च तक रहता है। वहीं, भारत में मानसून की दो शाखाएं हैं। पहला अरब सागर का मानसून और दूसरा बंगाल की खाड़ी का मानसून। ये दोनों भारत में बारिश करते हैं।

भारत में कैसे पता चलती है मानसून की एंट्री

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग भारत में मानसून आने का एलान करता है। केरल, कर्नाटक और लक्षद्वीप में जब लगातार बारिश होने लगती है, तो मौसम विभाग द्वारा इसके आने की घोषणा की जाती है। इसके लिए इन राज्यों के १४ स्टेशनों में से आठ स्टेशनों पर जब दो दिनों तक 2.5 एमएम से अधिक बारिश हो जाता है, तो मानसून की एंट्री मानी जाती है।

आउट गोइंग लौंग वेव रेडिएशन 220 मेगावाट से कम होनी चाहिए

भूमध्य रेखा से 10 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर समुद्र तल से 4किलोमीटर ऊँचाई पर हवाओं की गति ४० किलोमीटर /घंटे से अधिक होनी चाहिए।

क्या है प्री और पोस्ट मानसून बारिश

देश में मार्च से मई तक प्री मानसून रहता है। इस दौरान जब बारिश होती है तो उसे प्री मानसून माना जाता है। वहीं, जब सितंबर के बाद बारिश होती है, तो उसे पोस्ट मानसून कहा जाता है।

भारत में कब तक सक्रिय रहता है मानसून?

भारत में गर्मी का मानसून एक जून से 15 सितंबर तक सक्रिय रहता है। इसके बाद सर्दी का मानसून सक्रिय हो जाता है। अगर पूरे दक्षिण एशिया की बात की जाए, तो मानसून एक जून से एक सितंबर तक सक्रिय रहता है।

मानसून के आने से कैसे होती है बारिश?

भारत में जब मानसूनी हवाएं दक्षिण-पश्चिम तट पर पश्चिमी घाट से टकराती हैं, तो देश में बारिश होती है। हालांकि, कई बार मानसून तय तिथि से नहीं पहुंच पाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसे इस वर्ष चक्रवाती तूफान बिपार जॉय की वजह से मानसून प्रभावित हुआ है और तय तिथि से देरी से भारत पहुंचा है।