06HLEG14 आशंका पर चुनाव मतदान की पुनर्मतगणना नहीं कराई जा सकती : हाईकोर्ट
-ग्राम प्रधान चुनाव याचिका पर पीठासीन अधिकारी को सबूतों पर निर्णय लेने का निर्देश
प्रयागराज, 06 जून (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि ग्राम प्रधान चुनाव में एक वोट से विजयी घोषित होने पर बिना ठोस साक्ष्य के मात्र आशंका के आधार पर पुनर्मतगणना का आदेश देना सही नहीं है। पीठासीन अधिकारी को जिला चुनाव अधिकारी से रिकॉर्ड मतगणना अधिकारी को तलब कर परीक्षण करना चाहिए।
हाईकोर्ट ने पीठासीन अधिकारी के याचिका निरस्त करने व पुनरीक्षण अधिकारी के पुनर्मतगणना कराने के दोनों आदेशों को गलत करार देते हुए रद्द कर दिया और पीठासीन अधिकारी को चुनाव याचिका को साक्ष्य, दस्तावेज व बयान लेकर नये सिरे से 8 हफ्ते में निर्णय लेने के लिए प्रकरण वापस कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने आजमगढ़ के जोगियावीर के ग्राम प्रधान खुर्शीद अहमद की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
मालूम हो कि ग्राम प्रधान के चुनाव में याची एक वोट से विजयी घोषित हुआ। सवाल उठा कि कुल वोट 1167 या 1170 पड़े। 71 मत अवैध पाये गए। कहा गया कि वैध वोट 1096 पडे़। कुल 13 प्रत्याशी थे। विपक्षी ने चुनाव याचिका दायर की जिसे खारिज कर दिया गया। किंतु पुनरीक्षण अर्जी स्वीकार हो गई और एक महीने में पुनर्मतगणना का आदेश किया गया। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
कोर्ट ने कहा फार्म 46 देखा गया किन्तु फार्म 36 नहीं मंगाया गया। उपलब्ध नहीं था तो पीठासीन अधिकारी को चुनाव अधिकारी को बुलाने का अधिकार था। वह साक्ष्य ले सकते थे कि कुल कितने वोट पड़े और उस आधार पर उचित निर्णय ले सकते थे। पुनरीक्षण अधिकारी ने साक्ष्य नहीं देखे, केवल हलफनामे पर भरोसा कर पुनर्मतगणना का आदेश दे दिया। जिसे सही नहीं कहा जा सकता। पीठासीन अधिकारी के आदेश में त्रुटि थी तो रिमांड करना चाहिए था। कोर्ट ने पीठासीन अधिकारी को रिकार्ड तलब कर साक्ष्य लेकर नियमानुसार चुनाव याचिका तय करने का निर्देश दिया है।