मुख्यमंत्री चौहान ने मंगल पांडे और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की पुण्यतिथि पर किया नमन

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08HREG171 मुख्यमंत्री चौहान ने मंगल पांडे और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की पुण्यतिथि पर किया नमन

भोपाल, 08 अप्रैल (हि.स.)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 1857 की क्रांति के महानायक अमर शहीद मंगल पांडे के बलिदान दिवस तथा राष्ट्रीय गीत वंदे-मातरम के रचनाकार श्रद्धेय बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की पुण्य-तिथि पर शनिवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री चौहान ने निवास कार्यालय स्थित सभागार में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री चौहान ने ट्वीट करते हुए कहा कि “राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। जनमानस में राष्ट्रभक्ति की स्वतंत्र चेतना जागृत कर राष्ट्रबोध के गौरव से भरने वाली उनकी रचनाएं आज भी प्रेरित करती हैं।” वहीं, मंगल पांडे का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि “ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सिंहनाद कर मां भारती के गौरव की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग कर देने वाले वीर सपूत मंगल पांडे जी के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि देता हूं।”

उल्लेखनीय है कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने भारतीय जन-मानस में राष्ट्रीय चेतना जगाने का महत्वपूर्ण कार्य किया था। उनके द्वारा रचित राष्ट्रगीत वन्दे-मातरम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों का प्रेरणास्रोत बना। उनका सर्वाधिक प्रसिद्ध उपन्यास “आनंदमठ” है। बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म वर्ष 1838 में उत्तरी चौबीस परगना में हुआ था। उनका निधन 8 अप्रैल 1894 को हुआ।

देश में आजादी की लड़ाई का शंखनाद करने वाले अमर शहीद मंगल पांडेय का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया में हुआ था। वे ईस्ट इंडिया कंपनी की 34वीं बंगाल इंफेन्ट्री के सिपाही थे। उन्हें आजादी की लड़ाई के नायक के रूप में सम्मान दिया जाता है। भारत के स्वाधीनता संग्राम में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर केन्द्र सरकार द्वारा उनके सम्मान में वर्ष 1984 में एक डाक टिकट जारी किया गया। अंग्रेजों को डर था कि मंगल पांडे ने विद्रोह की जो चिंगारी जलाई है वह देश में कहीं ज्वाला न बन जाए। इसलिए तय तारीख से 10 दिन पहले ही 8 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे को फाँसी दे दी गई।