मेट्रो संचालन को एक अरब रुपये, गोरखपुर की उम्मीद जगी

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22HREG432 मेट्रो संचालन को एक अरब रुपये, गोरखपुर की उम्मीद जगी

– केंद्र के बाद यूपी सरकार ने भी मेट्रो के लिए किया धन का प्रावधान

– गोरखपुर मेट्रो परियोजना को रफ्तार मिलने की उम्मीद

गोरखपुर, 22 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्र सरकार के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार ने भी मेट्रो के लिए धन का प्रावधान किया है। वाराणसी और गोरखपुर में मेट्रो संचालन को एक अरब रुपये मिले हैं। इससे मेट्रो परियोजना को रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

4672 करोड़ की लागत से शहर के दो रूटों पर तीन बोगी वाली मेट्रो दौड़ाने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को यूपी कैबिनेट की पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड ने भी अपनी स्वीकृति दे दी है। बजट मिलने से निर्माण कार्य जल्दी ही शुरू होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पहले कार्यकाल में ही गोरखपुर में मेट्रो रेल के लिए सर्वे करने के निर्देश दिए थे। सर्वे के बाद डीपीआर तैयार किया गया और इसे वर्ष 2021 में मंजूरी दे दी गई। इसके मुताबिक रेल ट्रांजिट परियोजना में दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। पहला कॉरिडोर श्यामनगर से मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तक होगा। इसकी लंबाई 15.14 किलोमीटर है। इस कॉरिडोर में 14 स्टेशन होंगे जबकि दूसरा कॉरिडोर बीआरडी मेडिकल कॉलेज से नौसड़ चौराहे तक जाएगा। इसकी लंबाई 12.70 किलोमीटर है। इस कॉरिडोर में 13 स्टेशन होंगे। डीपीआर के मुताबिक हर एक किलोमीटर पर एक स्टेशन बनाया जाएगा।

पहला रूट

श्याम नगर, बरगदवां, शास्त्रीनगर, नथमलपुर, गोरखनाथ मंदिर, हजारीपुर, धर्मशाला, गोरखपुर रेलवे स्टेशन, यूनिवर्सिटी, मोहद्दीपुर, रामगढ़ताल, एम्स, मालवीयनगर, एमएमएमयूटी।

दूसरा रूट

बीआरडी मेडिकल कॉलेज, मुगलहा, खजांची बाजार, बशारतपुर, अशोक नगर, वैष्णो नगर, असुरन चौक, धर्मशाला, गोलघर, कचहरी चौराहा, बेतियाहाता, ट्रांसपोर्टनगर, नौसड़।

मेट्रो रूट पर फोरलेन का निर्माण कार्य पूरा

महानगर में जिन रूटों से मेट्रो गुजरेगी, उस पर फोरलेन निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो गया है। टेक्निकल यूनिवर्सिटी से गुरुंग तिराहा होते हुए मोहद्दीपुर तक फोरलेन बन चुका है। इसी तरह मोहद्दीपुर से गोरखनाथ मंदिर होते हुए जंगल कौड़िया तक फोरलेन का काम भी पूरा है। चूंकि, फोरलेन के डिवाइडर पर ही मेट्रो के लिए पिलर बनने हैं, ऐसे में अब कोई बाधा नहीं रहेगी। इसी के साथ गुलरिहा से मेडिकल कॉलेज, असुरन होते हुए धर्मशाला तक भी पिलर बनाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।