30HREG105 बाल आयोग अध्यक्ष ने गिनाई एक वर्ष की उपलब्धियां
देहरादून, 30 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने एक अपने एक वर्ष के कार्यकाल उपलब्धियों, अनुभव और चुनौतियों की जानकारी सोमवार को मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि बाल अधिकार आयोग के गठन को एक वर्ष बीत चुका है।
डॉक्टर गीता खन्ना ने कहा कि अध्यक्ष होने के नाते मुझे हर बच्चे के अधिकारों के संरक्षण में अपना सारथी बनाना है। आयोग ने अपने आप को बाल अधिकारों का पहरेदार साबित किया है। उन्होंने इस अवसर पर 12 सूत्री जानकारी दी तथा कहा कि उत्तराखंड हाई कोर्ट की जुबिनाइल जस्टिस कमेटी ने हमारे अनुरोध पर एक बैठक की, जिसमें प्रशासन और आयोग के माध्यम से कार्य हो रहा है। आयोग को मिली 110 शिकायतों का निस्तारण किया गया है तथा एक कर्मठ अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जा रहा है।
आयोग सभी जनपदों से प्राप्त समस्याओंके निस्तारण के लिए समन्वय बैठकें कर रहा है और निजी स्कूलों में दृष्टि रखने के लिए एक मॉनटरिंग कमेटी बनाए जाने का प्रस्ताव है। आयोग द्वारा बच्चों से संबंधित दिवसों को मनाने का काम चल रहा है। बाल विधानसभा 2022 में 70 बाल विधायकों का चयन किया गया तथा उनमें कर्तव्यनिष्ठा जाग्रत की गई। इस बाल विधानसभा ने अच्छा कार्य किया है।
डॉक्टर खन्ना ने बताया कि पुलिस और प्रशासन के सहयोग से सभी चयनित 70 बाल विधायक अपने क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रहे हैं। आयोग द्वारा प्लान इंडिया, शिव नाडर संस्था और बचपन बचाओ आंदोलन के माध्यम से वह यूनिसेफ के माध्यम से कार्रवाइयां की जा रही हैं। बाल श्रम उन्मूलन के तहत डिस्ट्रिक्ट टॉस्क फोर्स द्वारा बचाए गए 111 बच्चों को शिक्षा के मुख्य धारा से जोड़ा गया है। बाल श्रम कराने वाले 56 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग के सदस्य विनोद कपरवाण, दीपक गुलाटी, सुमन राय एवं धर्म सिंह द्वारा बाल गृहों, विद्यालयों, बाल मित्र पुलिस थानों, कोचिंग संस्थानों के औचक निरीक्षण किए गए हैं ताकि बालकों से कोई अन्याय न होने पाये।