29HREG329 आरएसएस के चौथे सरसंघचालक प्रोफ़ेसर रज्जू भैया की जयंती स्वयंसेवकों ने मनाई धूमधाम से
प्रोफ़ेसर रज्जू भैया की जयंती पर स्वयंसेवकों ने किया सुंदरकाण्ड पाठ
सुलतानपुर, 29 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चौथे सरसंघचालक रज्जू भैया की जयंती के अवसर पर रविवार को रज्जू भैया सदन में स्वयंसेवकों ने सुंदर काण्ड पाठ का आयोजन किया गया।
सुलतानपुर जिले के लवकुश नगर में स्थित प्रोफेसर रज्जू सिंह “रज्जू भैया सदन” में रविवार को सुन्दर काण्ड पाठ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभाग संघचालक डॉ रमाशंकर मिश्र ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए बताया कि रज्जू भैया का जन्म 29 जनवरी 1922 बुलंदशहर में हुआ था। उनकी मृत्यु 14 जुलाई, 2003 को हुई। आज उनकी जयंती के 100 वर्ष पूरे हो गये। उनके पिता का नाम बलवीर सिंह था, जो सिंचाई विभाग में अभियंता थे। वे बहुत ही ईमानदार थे एवं उनका जीवन आध्यात्मिक था। इनकी माता का नाम श्रीमती ज्वाला देवी उपाख्य “आनंदा” था जो एक कुशल गृहणी थी।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि प्रोफ़ेसर रज्जू भैया विद्यार्थी जीवन काल से ही वह कुशाग्र बुद्धि थे। पिता के सानिध्य में रहने के कारण ही उनका प्रभाव सबसे अधिक रहा है, प्रयाग विश्वविद्यालय में प्रवेश के पश्चात पढ़ाई पूरी की। प्रयाग विश्वविद्यालय में रहते हुए ही संघ के स्वयंसेवक बने। प्रायोगिक परीक्षा में डॉक्टर सी वी रमन ने आपसे बंगलुरु में रिसर्च करने को कहा लेकिन संघ से संपर्क एवं विचारों से प्रभावित होने के कारण वे प्रचारक हो गए। संघ के प्रचारक होते हुए आपने संघ कार्य विदेशों में भी फैलाया है। प्रोफेसर रज्जू भैया 11 मार्च 1994 की चौथे सरसंघचालक बने।
कहा कि वह अपने जीवन काल में उन्होंने व्यक्तित्व का नहीं, तत्व निष्ठा के महत्व पर ध्यान दिया। आद्य सरसंघचालक से लेकर वर्तमान सरसंघचालक तक को अधिकारी नहीं वरन नींव का पत्थर ही माना है। परम पूज्य “भगवा ध्वज” को गुरु मानकर संघ का कार्य लगातार आज भी चल रहा है ,जो एक विशाल वट वृक्ष के रूप में है।
इस मौके पर प्रमुख रूप से सह जिला संघचालक अजय गुप्त, नगर संघचालक अमरपाल, जिला कार्यवाह डॉक्टर पवनेश, सह जिला कार्यवाह भानु, अजय सिंह, पवन, संजय समेत अन्य लोग मौजूद रहे रहे।