(अपडेट)उज्जैन: देर शाम तक चला शनिश्चरी अमावस्या का स्नान, श्रद्धालुओं का आंकड़ा पहुंचा 2 लाख के पार

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Ujjain: Bathing of Shanishchari Amavasya con

21HREG298 (अपडेट)उज्जैन: देर शाम तक चला शनिश्चरी अमावस्या का स्नान, श्रद्धालुओं का आंकड़ा पहुंचा 2 लाख के पार

उज्जैन, 21 जनवरी (हि.स.)।शहर के इंदौर मार्ग स्थित त्रिवेणी संगम पर शनिश्चरी अमावस्या का स्नान शनिवार देर शाम तक चला। दूरस्थ अंचलों एवं अन्य प्रदेशों से आए श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी घाट पर पुण्य स्नान किया और घाटों पर पनोती (पहने हुए कपड़े एवं चरण पादुका) छोड़कर शनिदेव के दर्शन किए। साथ ही कृपा बनाए रखने की कामना की। दोपहर बाद तक करीब 2 लाख श्रद्धालु तीर्थ स्नान कर शनिदेव के दर्शन कर चुके थे।

इंदौर मार्ग पर त्रिवेणी संगम पर तीर्थ स्नान का महात्म्य है। स्कंद पुराण के अवंति खण्ड में यहां पर तीन नदियों का संगम बताया गया है। सरस्वती नदी कालांतर में लुप्त हो गई थी वहीं कान्ह नदी एवं शिप्रा नदी यहां मिलती है। कान्ह नदी का दूषित पानी शिप्रा नदी में मिलता है,ऐसे में यहां पर कान्ह नदी का पानी रोका जाता है और देवास से नर्मदा का पानी पाइप लाइन से लाकर यहां छोड़ा जाता है। इसी पानी से फव्वारों की सहायता से स्नान होता है। शनिवार को भी यही क्रम रहा।

ठण्ड पर भारी रही आस्था

शनिवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्धालुओं ने स्नान प्रारंभ कर दिया था। उस समय जीवाजी वेधशाला से प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यूनतम तापमान करीब 10 डिग्री था। प्रात: 11 बजे तक एक लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। इस बीच स्नान का सिलसिला जारी रहा,जोकि सूर्यास्त तक चलता रहा । प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार दोपहर 2 बजे तक करीब 2 लाख श्रद्धालु तीर्थ स्नान एवं शनिदेव के दर्शन कर चुके थे।

कलेक्टर-एसपी कर रहे थे मानीटरिंग

घाटों एवं मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं का इंतजाम सतत कलेक्टर आशीषसिंह एवं एसपी सत्येंद्र शुक्ल कर रहे थे। परिसर में करीब 70 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे,इनमें से 30 जूम कैमरे थे। इसी प्रकार करीब 600 जवान व्यवस्थाओं में तैनात किए गए थे। घाट पर करीब 100 जगह पर बारकोड चिपकाए गए थे,ताकि श्रद्धालु भीड़ के बीच ऑनलाइन दान कर सकें। इसी प्रकार घाटों पर फव्वारों के माध्यम से महिलाओं-पुरूषों को स्नान करने की व्यवस्था थी। महिलाओं को वस्त्र बदलने के लिए अलग से अस्थायी टेंट कॉटेज बनाए गए थे। मंदिर परिसर में दर्शन करने वालों के लिए अलग से बैरिकेडिंग की गई थी। चार पहिया वाहनों की पार्किंग की लम्बी लाइन लगी रही वहीं आने वालों का सिलसिला सतत जारी रहा।

पनोतियां छोड़कर गए घाटों पर

यह मान्यता है कि शनिश्चरी अमावस्या को तीर्थ स्नान के बाद आनेवाला श्रद्धालु अपने वस्त्र तथा चरण पादुका घाट पर ही छोड़ जाते हैं। इसे वे पनोती छोड़ना बोलते हैं,जिससे आशय समझा जाता है कि जो भी समस्याएं/अला-बला है,वे वहीं छूट जाएं और व्यक्ति यहां से समस्याओं से मुक्त होकर जाए। घाट पर श्रद्धालुओं ने श्रीफल भी अर्पित किए क्योंकि मंदिर में ले जाना इतने श्रद्धालुओं के लिए संभव नहीं था।

पूरे शहर में रही चहल पहल

घाट,मंदिर परिसर के अलावा शहर में भी मिनी कुंभ जैसा नजारा रहा। हजारों श्रद्धालु स्नान,दर्शन के बाद महाकाल लोक,गोपाल मंदिर,हरसिद्धि मंदिर तथा अन्य देवीय स्थानों पर दर्शन के लिए गए। इधर बस स्टैण्ड के अलावा रेलवे स्टेशन पर भी श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा रहा।