19HREG478 ‘कश्मीर फाइल्स’ की तरह न देखनी पड़े ‘द इंडिया फाइल्स’ !
-19 जनवरी 1990 के कश्मीरी हिंदुओं के पलायन की बरसी पर ”बेदखल विभीषिका दिवस” कार्यक्रम का आयोजन
लखनऊ, 19 जनवरी (हि.स.)। जब कश्मीर से हिंदू भगाए जा रहे थे, तब देश का हिंदू चुप था, उस वक्त सभी ने साथ आवाज उठाई होती तो कश्मीर से हिंदुओं का पलायन न होता। यह बात शिक्षाविद् डाॅ रवीश कुमार ने गुरुवार को कहीं। वो राजधानी लखनऊ के श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल में ”पनुन कश्मीर” (हमारा अपना कश्मीर) कार्यक्रम में वक्तव्य दे रहे थे। उन्होंने कहा कि आज भी हिंदू समाज दूसरे हिंदुओं के दर्द को अपना नहीं समझता। उसके एकजुट न रहने का फायदा राष्ट्रविरोधी तत्व उठाते हैं।
कार्यक्रम में कश्मीरी हिंदुओं के लिए किए गए डाॅ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को याद किया गया। विशिष्ट अतिथि रवि कचारू और दीपक कचारू ने उस दौरान के कई दुखद संस्मरणों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि भयानक ठंड के बीच कश्मीरी हिंदुओं के लिए 19 जनवरी 1990 की रात अपने ही सरजमीं पर भारी पड़ गई। मजहबी स्थलों के लाउडस्पीकरों से ऐलान होने लगा कि कश्मीरी पंडितों कश्मीर को छोड़ो वरना धर्म बदलने या मरने को तैयार रहो। चारों तरफ ”कश्मीरी पंडितों घाटी छोड़ो” जैसे नारे लगने लगे। वैसे तो कश्मीरी हिंदुओं को बेदखल करने की शुरुआत पिछले कई दिनों से हो चुकी थी, लेकिन उस दिन लोग सड़कों पर उतर आए और दहशत का ऐसा माहौल बना दिया गया कि कश्मीरी हिंदू अपनी गृहस्थी, नौकरी या कारोबार छोड़ पलायन करने को मजबूर हो गए। इसके बाद जिन हिंदुओं ने वहां रहने का साहस दिखाया उन्हें या तो अपनी जान गंवानी पड़ी या अपना धर्म परिवर्तन करना पड़ा।
कार्यक्रम में सावरकर विचार मंच के डाॅ अजय दत्त शर्मा और एमडी शर्मा ने अनुच्छेद 370 हटने के बाद हिंदुओं के कागजों पर नहीं, वास्तविक पुनर्वास कराने पर जोर दिया। हिंदू महासभा प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने कहा कि जातिगत भेद छोड़ हिंदू समाज को हर तरह से एकजुट रहना चाहिए, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को कभी ”द इंडिया फाइल्स” जैसी मूवी न देखनी पड़े। कार्यक्रम में आशीष शुक्ला, रमेश प्रसाद अवस्थी, सुनील शंखधर सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।