10HREG248 नई शिक्षा नीति के आधार पर होंगी कुमाऊं विश्वविद्यालय की स्नातक प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं
-कुमाऊं विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति की बैठक में लिये गए कई निर्णय
नैनीताल, 10 नवंबर (हि.स.)। कुमाऊं विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अब अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा के बाद अंकतालिका और उपाधि प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। विश्वविद्यालय परीक्षार्थियों से अंतिम परीक्षा के शुल्क के साथ ही उपाधि यानी डिग्री का शुल्क भी ले लेगा और उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को अंकतालिका के साथ ही उपाधि उनके पते पर घर भिजवाएगा। गुरुवार को हुई कुमाऊं विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है।
कुलपति प्रो. एनके जोशी की अध्यक्षता में विवि प्रशासनिक भवन में हुई बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 20 से कम विद्यार्थी एवं परास्नातक पाठ्यक्रम में 15 से कम विद्यार्थियों का पंजीकरण होने पर ऐसे पाठ्यक्रमों को बंद कर दिया जाएगा। बैठक में कुलपति प्रो. जोशी ने कहा कि नई शिक्षा नीति के आधार पर पहली बार कुमाऊं विश्वविद्यालय में स्नातक प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित की जाएगी। इसलिए विवि अधिकारी व प्राध्यापक विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मार्गदर्शक की भूमिका का निर्वहन करें। छात्रों के विभिन्न प्रकरणों के त्वरित निष्पादन के लिए चार सदस्यीय एक समिति का गठन भी किया गया। यह भी तय हुआ है कि विश्वविद्यालय में आगामी परीक्षाएं नई शिक्षा नीति के तहत होंगी। इसके लिए परीक्षार्थियों को अपनी एबीसी यानी एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की आईडी बनानी आवश्यक होगी। इसके बिना परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी। बैठक में नई शिक्षा नीति के तहत परीक्षाएं कराने पर भी मंथन किया गया।
कुलसचिव दिनेश चंद्रा ने कहा कि विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय एवं संस्थानों की ओर से विवि द्वारा निर्धारित अंतिम तिथि तक पोर्टल में आंतरिक व प्रयोगात्मक मूल्यांकन के अंक अपलोड नहीं किए जाते हैं, जिससे परीक्षाफल घोषित किए जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे महाविद्यालयों के लिए प्रति विद्यार्थी विलंब शुल्क निर्धारित किया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए प्रवेश के एक माह के भीतर प्रवर्जन प्रमाण पत्र महाविद्यालय में जमा किया जाना अनिवार्य होगा। एक माह के अंतर्गत प्रमाण पत्र जमा न किए जाने पर विलंब शुल्क देना होगा। निर्धारित तिथि के बाद विशेष परिस्थितियों में 500 रुपये विलंब शुल्क के साथ 10 दिनों के लिए परीक्षा आवेदन पत्र भरने की अनुमति दी जाएगी। इसके बाद किसी भी दशा में परीक्षा आवेदन पत्र भरने एवं विद्यार्थी को परीक्षा में शामिल नहीं किए जाने का निर्णय लिया गया। बैठक में प्रो. संजय पंत, प्रो. अतुल जोशी, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. महेंद्र राणा आदि परीक्षा समिति के सदस्य भी उपस्थित रहे।