देहरादून, 21 मई (हि.स.)। आबकारी विभाग अपने कामों के लिए सदैव चर्चाओं में रहता है। चाहे लक्ष्य से कम राजस्व की प्राप्ति हो या बकाया वसूल न पाना। आबकारी के कुछ अधिकारी ठेकेदारों और बकायादारों को संरक्षण देते हैं, यही कारण है कि सरकार का इन व्यापारियों और कारोबारियों पर करोड़ों का अधिभार बताया है।
इनमें सबसे कम अधिभार 13 लाख पिथौरागढ़ का है जबकि सबसे अधिक 33 करोड़ से अधिक का अधिभार उधमसिंहनगर का है जो सरकार को नहीं मिला है। आंकड़ों की माने तो प्रदेश के 12 जनपदों में यह अधिभार बकाया है। इनमें नैनीताल जनपद पर 11.98 करोड़, अल्मोड़ा पर 5.25 करोड़, चंपावत पर 76 लाख अधिभार बकाया है। इसी प्रकार हरिद्वार जनपद पर 19 लाख, देहरादून जनपद पर 15.01 करोड़, टिहरी जनपद पर 3 करोड़, उत्तरकाशी में 82 लाख, रुद्रप्रयाग में 2.30 करोड़, पौड़ी में 12.04 करोड़ तथा चमोली में 4.16 करोड़ बकाया है।
भले ही शराब की दुकानों का आवंटन कर दिया गया है, लेकिन शराब कारोबारी अपना बकाया देने से कतरा रहे हैं। प्रदेश में 88 करोड़ का बकाया विभिन्न शराब कारोबारियों पर बना हुआ है, जिसे आबकारी विभाग वसूल नहीं पा रहा है। केवल बागेश्वर जिला पूर्ण रूप से राजस्व इकट्ठा करने में प्रभावी रहा है लेकिन अन्य 12 जनपद इस मामले में पिछड़े हैं जिसके कारण सभी 12 जनपदों पर राज्य का 88 करोड़ अभी अवशेष है जो अधिभार के रूप में मिलना था पर अब तक नहीं मिला। आबकारी विभाग की तरफ से इस को लेकर समीक्षा भी की गई है और जल्द से जल्द अधिभार जमा करवाने के निर्देश जिला आबकारी अधिकारियों को दिए गए हैं।