अनूपपुरः रेलवे के जबलपुर और बिलासपुर जोन में अलग-अलग नियम - सरस जनवाद

अनूपपुरः रेलवे के जबलपुर और बिलासपुर जोन में अलग-अलग नियम

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अनूपपुर, 19 अप्रैल (हि.स.)। एक्सीप्रेस व सुपरफास्ट यात्री ट्रेनों में अनारक्षित बोगी में सफर के लिए स्टेशन में काउंटर से अनारक्षित टिकट के संबंध में जबलपुर और बिलासपुर जोन में अलग-अलग नियम हैं। अनारक्षित टिकट संबंधी रेलवे बोर्ड का आदेश डेढ़ माह बाद भी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोन में लागू नहीं हो सका है। आम यात्रियों की सुविधा से जुड़ी जरूरी आदेश के लागू नहीं होने से शहडोल स्टेशन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री परेशान होते हैं। गांव से आने वाले कई यात्री इन ट्रेनों में सफर ही नहीं कर पाते हैं। इमरजेंसी में सफर करना भी पड़ा तो बिना टिकट के ही यात्रा करने विवश होते हैं और सफर के दौरान अनावश्यक दंड राशि भी जमा करनी पड़ती है।

यात्रियों ने बताया कि अनारक्षित बोगी में सफर के लिए स्टेशन से अनारक्षित टिकट दिए जाने की सुविधा पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर जोन में लागू है। दूसरी ओर पड़ोसी जोन बिलासपुर के अधिकारियों द्वारा रेलवे बोर्ड का आदेश दरकिनार कर दिए जाने के कारण आम यात्रियों को सफर के लिए दिक्तों का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, रेलवे बोर्ड द्वारा 28 फरवरी को आदेश जारी कर कहा गया था कि रेलवे स्टेशनों में टिकट बिक्री के लिए कोरोना काल से पहले की व्यवस्था लागू कर दी जाए। हालांकि इसके लिए रेलवे बोर्ड ने जोन के महाप्रबंधक को अधिकृत किया था और इसी का फायदा उठाते हुए बिलासपुर जोन के अधिकारियों ने रेलवे बोर्ड के आदेश को दरकिनार कर दिया।

टिकट के लिए ऐसे परेशान होते हैं आम यात्री

छोटी दूरी की सफर के लिए रिजर्वेशन कराना पड़ता है। स्टेशन दूर हुआ तो ऑनलाइन टिकट में प्रत्येक टिकट में लगभग 20 रुपये अतिरिक्त राशि तक देना पड़ती है।

जबलपुर जोन में लागू नियम, बिलासपुर ने नकारा

रेल यात्रियों ने बताया कि रेलवे बोर्ड का आदेश लागू करने में जबलपुर जोन के अधिकारियों को तकनीकी समस्या नहीं आई। बोर्ड से आदेश जारी होने के कुछ दिन बाद ही 52 ट्रेनों के लिए काउंटर से अनारक्षित टिकट की सुविधा उपलध करवाई गई थी। रेलवे बोर्ड का आदेश लागू नहीं करने के पीछे बिलासपुर जोन के अधिकारी तकनीकी कारणों का हवाला दे रहे हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोन के सीपीआरओ साकेत रंजन ने बताया कि रेलवे बोर्ड का आदेश 28 फरवरी को जारी हुआ था। इससे पहले चार माह तक रिजर्वेशन के लिए समय दिया जाता है। यह अवधि समाप्त होने के बाद रेलवे बोर्ड का आदेश लागू हो सकेगा।