– मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होगी
झांसी,19 अप्रैल (हि.स.)। महारानी लक्ष्मीबाई के किले की पहाड़ी (नींव) की खुदाई कर स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट के तहत पाथ वे बनवाया जा रहा है। जिसमें पहाड़ी(नींव) से काफी बड़े- बड़े बोल्डर व पत्थर गिरा दिए जाने एवं पहाड़ी को काटे जाने से पहाड़ी(नींव) कमजोर हो रही है। जिससे कालान्तर में महारानी के किले के धसकने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसी ही सभी संभावनाओं को लेकर बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ने अधिकारियों के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। वही न्यायालय में में वाद दाखिल किया गया।
मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय ने बताया कि सूचना के अधिकार में झांसी के पुरातत्व विभाग ने बताया है कि झांसी दुर्ग एवं दुर्ग के चतुर्दिक भूमि भी केन्द्रीय संरक्षित स्मारक रानी झांसी के किले का हिस्सा है। जोकि भारत सरकार द्वारा केंद्रीय स्मारक की सूची में अधिसूचित है। भारतीय पुरातत्व सर्वे के एक्ट में प्रावधान है कि प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 2010 के अनुसार हमारी विरासत को सुरिक्षत एवं संरक्षित रखना है। यह राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के प्रतिषिद्ध क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण, चाहे वह लोक परियोजना (सरकारी निर्माण) ही क्यो न हो 100 मीटर के दायरे में नहीं किया जा सकता।
बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ने प्रशासनिक अधिकारियों, महापौर से एक्ट के विरुद्ध कार्य रुकवाने का आग्रह किया, लेकिन किसी ने भी कार्य नहीं रुकवाया। हारकर बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय द्वारा महापौर, नगर आयुक्त, स्मार्ट सिटी एवं पुरातत्व विभाग झांसी के अधिकारियों सहित संबधित अधिकारियों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दर्ज करने के लिए दी। रिपोर्ट दर्ज नही किये जाने पर न्यायालय सीजेएम में धारा 156(3) के तहत अधिवक्ता गौतम अस्थाना द्वारा आवेदन किया।
न्यायालय सीजेएम द्वारा भानू सहाय की ओर से अधिववक्ता गौतम अस्थाना, अधिववक्ता प्रदीप झा व अनुराग मिश्रा द्वारा प्रस्तुत समस्त दस्तावेजी साक्ष्य, फ़ोटो ग्राफ्स एवं वीडियो देखकर आदेश दिया है कि झांसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को आदेशित किया जाता है कि उच्चतम न्यायालय की विधि व्यवस्था ललित कुमारी वनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2014)2 एससीसी-1 में दिशा निर्देशों के अनुपालन में उक्त प्रकरण के संबंध में उसकी जांच कर व वीडियोग्राफी कराकर अपनी रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष 13 मई तक प्रस्तुत करना सुनिश्चित करे। अगली सुनवाई की तिथि 13 मई सुनिश्चित की गई है।