देहरादून, 18 अप्रैल (हि.स.)। मैक्स अस्पताल देहरादून के चिकित्सकों ने एक 36 वर्षीय मरीज का रेयर लीवर टीबी की सफल सर्जरी की है। प्राइमरी ट्यूबरक्लोसिस विशेष रूप से एक असामान्य लक्षण है, जिसके विश्व भर में कुछ ही मामले देखने को मिले हैं। आमतौर पर यह बीमारी किसी दूसरे संक्रमित माध्यम से खून के प्रवाह या किसी सर्जरी के दौरान सीडिंग से फैलती है।
सोमवार को राजपुर स्थित एक होटल में मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के चिकित्सकों ने पत्रकार सम्मेलन में यह जानकारी दी। चिकित्सकों ने बताया कि विश्व यकृत (लीवर) दिवस के मौके पर यह खबर इस बीमारी से परेशान मरीजों के लिए सुखद है।
डॉ. मयंक नौटियाल और डॉ. करमजोत सिंह बेदी की देखरेख में चिकित्सकों की टीम ने मरीज़ के उपचार के लिए लीवर के बाएं हिस्से को हटाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया। मरीज़ पिछले तीन महीने से तेज़ पेट दर्द से परेशान थीं और दवाएं लेने के बाद भी हालत में सुधार न होने की वजह से कई डॉक्टरों के पास उपचार के लिए गए थे।
लीवर ट्रांसप्लांट एवं सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के कंसल्टेंट और हेड, डॉ. मयंक नौटियाल ने बताया कि सीटी स्कैन के दौरान मरीज़ के लीवर के बाएं भाग में एक जटिल सिस्टिक-सॉलिड ट्यूमर का पता लगा था। इससे पहले वो कई जगहों पर उपचार और कई तरह के टेस्ट कराए थे फिर भी उनकी परेशानी का कोई हल नहीं निकला। सर्जरी के चौथे ही दिन उनको छुट्टी दे दी गई और अब मरीज बिल्कुल स्वस्थ्य हैं।
लीवर ट्रांसप्लांट एवं सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के कंसल्टेंट डॉ. करमजोत सिंह बेदी ने कहा कि आंतरिक (ठोस अंग) ट्यूबरक्लोसिस बहुत ही रेयर है और आमतौर पर ये सेकेंडरी होता है, जो किसी दूसरे संक्रमित माध्यम से खून के प्रवाह से फैलता है या किसी सर्जरी के दौरान सीडिंग की वजह से होता है।
यह सर्जरी, दिसंबर महीने में मैक्स अस्पताल देहरादून में लॉन्च हुए लीवर क्लिनिक में की गई। हाल ही में लॉन्च किया गया लीवर क्लिनिक, हेपेटोलॉजी, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, लीवर ट्रांसप्लांट, जीआई सर्जरी, जीआई सम्बंधित रेडियोलॉजी और प्रयोगशाला की सेवाएं प्रदान करता है।
मौतों की दसवीं वजह लीवर-
मैक्स अस्पताल के वीपी-ऑपरेशंस एंड यूनिट हेड डॉ संदीप सिंह तंवर ने बताया, “भारत में होने वाली मौतों की दसवीं वजह लीवर से जुड़ी बीमारी है और हाल ही में नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर की बीमारी तेज़ी से बढ़ रही है। लीवर क्लिनिक की शुरुआत की गई है। ये लीवर हेल्थ, लीवर से जुड़ी बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने में सहायक बनेगा। जहां मरीज़ों की सहायता और उन्हें सलाह देने के लिए लीवर फिजिशियन और सर्जन होंगे। पीलिया, या शराब से जुड़ी समस्याएं, आखरी स्टेज में लीवर सिरोसिस, फैटी लीवर, लीवर कैंसर, वायरल हेपेटाइटिस वाले मरीज़ अपने मौजूदा हेल्थ रिकॉर्ड के साथ विशेषज्ञों तक जा सकते हैं और ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल की राय ले सकते हैं।