देहरादून, 07 अप्रैल (हि.स.)। विश्व स्वास्थ्य दिवस पर मेडिका ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने ‘इम्पैक्ट ऑफ पॉल्यूशन ऑन हेल्थ’ विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया। यह कार्यक्रम हर साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस पर मनाया जाता है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर मेडिका ने प्रदूषण-जनित बीमारियों और स्वास्थ्य गैर-बराबरी मिटाने तथा सभी के लिए एक बेहतर ग्रह और स्वास्थ्य हासिल करने के तरीके खोजने के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक पैनल की मेजबानी की।
मेडिका सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. दिलीप कुमार ने बताया, “प्रदूषण मृत्यु का एक ऐसा कारण है, जिसे नजरअंदाज किया जाता है और वायु प्रदूषण तो दुनिया भर में होने वाली मौतों का चौथा सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। हृदय वाहनियों से जुड़े पहलुओं के संदर्भ में प्रदूषण बढ़े हुए एथेरोस्क्लेरोसिस का कारण बन सकता है। एथेरोस्क्लेरोसिस रक्त वाहिनियों के सख्त होने या वाहिनियों में रुकावट पैदा होने जैसा ही है।
उन्होंने बताया कि एथेरोस्क्लेरोसिस कोरोनरी धमनियों के कारण परिधीय धमनियां अवरुद्ध हो जाती हैं। 1970 के दशक में अमेरिका ने क्लीन एयर एक्ट नामक अधिनियम लागू किया था ताकि वे प्रदूषण से होने वाली अपनी मृत्यु दर को 70 प्रतिशत तक घटा सकें। अगर अमेरिका ऐसा कर सकता है तो हम एशियाई या विकासशील देश क्यों नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के कारण दुनिया भर में हर साल लगभग 6.5 मिलियन मौतें हो रही हैं और इन 6.5 मिलियन में से 60 प्रतिशत मौतें हृदय रोगों के कारण होती हैं।“
डॉ. अविरल रॉय ने अपने कुछ निष्कर्ष साझा करते हुए बताया कि ‘प्रदूषण, जिसमें वायु प्रदूषण भी शामिल है, औसत भारतीय नागरिक और सड़क पर निकले साधारण आदमी के लिए एक अजाब है। प्रदूषण की उच्चता केवल अस्थमा, सीओपीडी, सांस लेने में कठिनाई जैसी परिचित बीमारियों से ही नहीं, बल्कि अन्य समस्याओं के साथ भी जुड़ी हुई है, जो कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड की अधिक मात्रा के कारण उत्पन्न होती हैं।
डॉ नंदिनी बिस्वास ने कहा कि ‘प्रदूषण तथा इसका हमारे जीवन और पृथ्वी पर पड़ने वाला प्रभाव आज के दिन और पूरी दुनिया के लिए बड़ा ही प्रासंगिक विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के कारण सीओपीडी फेफड़ों के जाम होने की पुरानी बीमारी है और फिलहाल पूरी दुनिया में यह मौत का तीसरा प्रमुख कारण बन चुकी है।
इस अवसर पर जानकारी दी गई कि प्रदूषण के कारण हर साल दुनिया भर में लगभग 6.5 मिलियन मौतें हो रही हैं और इनमें से 60 प्रतिशत मौतें हृदय रोगों के कारण होती हैं। सीओपीडी फेफड़ों को जाम करने वाली एक पुरानी बीमारी है और फिलहाल यह दुनिया में मौत का तीसरा प्रमुख कारण बनी हुई है। हालांकि बहुत जल्द यह दुनिया में मौत का पहला प्रमुख कारण बन जाएगी। प्रदूषण हर साल समय से पहले होने वाली लगभग 90 लाख मौतों, भारी आर्थिक नुकसान, मानव पूंजी के क्षरण और पारिस्थितिकी तंत्रों की तबाही के लिए जिम्मेदार है।