कृषि मंत्री ने कृषि समस्याओं पर बालकृष्ण से की चर्चा

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हरिद्वार, 5 अप्रैल (हि.स.)। उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने पतंजलि योगपीठ पहुंचकर आचार्य बालकृष्ण से भेंट की । इसके साथ ही प्रदेश सरकार के कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश में कृषि सम्बंधी समस्याओं तथा उनके समाधान में पतंजलि की भूमिका व सहयोग पर चर्चा की। बैठक में जैविक कृषि को बढ़ाने पर जोर दिया गया।

इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि जैविक कृषि के क्षेत्र में हमने काफी अग्रणी कार्य किया किन्तु उत्तराखण्ड में अभी और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पतंजलि जैविक प्रमाणीकरण के लिए मान्यता प्राप्त है तथा पहली ऐसी संस्था है जिसने जैविक कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया। आचार्य जी ने कहा कि ज्यादा उत्पादन के लालच में किसान परंपरागत कृषि को छोड़कर रसायनों की ओर चला गया। कहीं-कहीं इसका लाभ भी हुआ किन्तु फसलवार रासायनिक उर्वरक की सही मात्र की जानकारी तथा प्रशिक्षण के अभाव में इसने जहर का रूप ले लिया। आचार्य जी ने कहा कि किसानों की मानसिकता बन गई है कि यूरिया डालना छोड़ दिया तो खेती नष्ट हो जाएगी, रसायनों का स्प्रे करना छोड़ दिया को कीट फसलों को खराब कर देंगे। उन्होंने मंत्री से आग्रह किया कि प्रदेश में कीटनाशकों को दवा के नाम से सम्बोधित न किया जाए तथा साथ ही उत्तराखण्ड जैविक कृषि का प्रशिक्षण देने वाला पहला राज्य बने।

बैठक में मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में यथोचित सुधार के लिए हमें आचार्य बालकृष्ण के अनुभव तथा पतंजलि के गहन अध्ययन का लाभ लेना चाहिए। उत्तराखण्ड की जनता से हमें मैंडेट देकर चुना है, उनकी सरकार से कुछ अपेक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं उत्तराखण्ड कृषि में नम्बर वन बने तथा जो लोग रोजगार के लिए बाहर पलायन करते हैं वो कहें कि मैं पहाड़ पर जाकर खेती करूंगा। जोशी ने कृषि विभाग के अधिकारियों को 100 दिन में अपनी वर्क-रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।