चिदानंद मुनि के खिलाफ संतों का फूटा गुस्सा, सनातन धर्म से बाहर करने का दिया सुझाव

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हरिद्वार, 28 मार्च (हि.स.)। योग नगरी ऋषिकेश से परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद मुनि के आश्रम में मुसलमानों के नमाज पढ़े जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना के बाद से धर्मनगरी हरिद्वार के संतों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। संतों का कहना है कि ऐसे संत, जो सनातन धर्म-संस्कृति का अपमान कर रहा है, उसका बहिष्कार करते हुए मुंह काला किया जाएगा।

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हो रही है, जिसमें ऋषिकेश के संत चिदानंद मुनि अपने आश्रम में कुछ मुस्लिम नेताओं के साथ बैठे हैं। फोटो में ऐसा लग रहा है कि मुस्लिम नेता उनके ऋषिकेश आश्रम में नमाज पढ़ रहे है। इस फोटो के वायरल होने के बाद से हरिद्वार के संत स्वामी चिदानंद मुनि से खासा नाराज हैं। शाम्भवी आश्रम में परमाध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में संतों ने बैठक कर चिदानंद मुनि का विरोध किया गया। संतों के साथ बैठक के बाद स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि गंगा के पावन तट को दूषित करने का जो कार्य चिदानंद मुनि ने किया है, उस पर हरिद्वार के संत उनको माफ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि काली सेना ने संत के इस कार्य को धर्म विरोधी करार दिया है। उन्होंने संत को सनातन धर्म और निर्वाणी अखाड़ा से बाहर करने की सलाह दी है।

काली सेना के प्रमुख विनोद गिरी महाराज ने कहा कि काली सेना ऐसे किसी भी व्यक्ति या संत को बर्दाश्त नहीं करेगी, जो हिंदू विरोधी कार्य करेगा। अगर कोई संत इस तरह का कार्य करता है तो वह उसका विरोध करेंगे। उन्होंने घोषणा की कि चिदानंद मुनि के नमाज पढ़ाने वाले संत का मुंह काला करने का कार्य करेगी। इस मामले पर स्वामी चिदानंद ने सफाई देते हुए कहा कि जिस फोटो को वायरल किया जा रहा है, वह फोटो चार साल पुरानी हैं। इस फोटो में जो भी सज्जन दिख रहे हैं, उन सब के साथ चार साल पहले 15 अगस्त के दिन तिरंगा फहराया गया था। उन्होंने कहा कि इन तस्वीरों को अब उपयोग किसी गलत नियत के तहत किया जा रहा है।