दो दिवसीय विराट संत समागम एवं सौंदर्य लहरी परायण महोत्सव शुरू
वाराणसी, 26 मार्च (हि.स.)। श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य विधुशेखर भारती ने कहा कि वर्तमान दौर सनातन धर्म के लिए संक्रमण काल है। ऐसे में योग्य संन्यासियों की अत्यन्त आवश्यकता है। योग्य संन्यासी ही सनातन धर्म के विरुद्ध चल रहे दुष्प्रचार का जवाब दे सकता है।
सनातन धर्म की संदर्भ सहित व्याख्या कर समाज में व्याप्त भ्रांति को भी दूर कर सकता है। शंकराचार्य विधुशेखर भारती शनिवार को दो दिवसीय विराट संत समागम एवं सौंदर्य लहरी परायण महोत्सव के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे।
वेदांत भारती व श्री शंकराचार्य वाग्यसेवा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में श्रृंगेरी मठ महमूरगंज में आयोजित महोत्सव में उन्होंने कहा कि सदियों से सनातन धर्म पर आक्रमण हो रहे हैं। भारत भूमि पर एक हजार वर्ष पूर्व शंकराचार्य स्वामी का अवतरण होता है। शंकराचार्य के प्रयत्न से सनातन हिन्दू धर्म जीवित है। शंकराचार्य प्रणीत संन्यासी परंपरा का निर्वहन एवं धर्म जागरण संन्यासियों का मूल कर्तव्य है। उन्होंने कहा उपनिषद में प्रतिमा का तात्पर्य मूर्ति नहीं उपमा है। उपनिषद में व्याख्या है कि भगवान के समान कोई नहीं है।
शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म अनुयायी को धर्म के मूल तत्व को गहनता से समझना चाहिए। यजुर्वेद में उल्लेख है कि पारंपरिक धर्म का अनुसरण सदैव करते रहना चाहिए। पारंपरिक धर्म का परित्याग पाप है। महोत्सव में ओंकारेश्वर के पीठाधीश्वर प्रणवानंद स्वामी ने कहा कि सभी मत संप्रदाय के भाष्य व प्रकरण ग्रंथों को सहज भाषा में अनुवाद करना चाहिए। जिससे समाज भाष्य को सुगमता से समझ पायेगा।
पंचायती अखाड़ा के स्वामी आत्मानंद ने कहा कि आज समाज में बड़ी भ्रांति है अनुकूलता ही सुख है प्रतिकुलता ही दुख। भौतिकवाद चरम पर है। ऐसे में शंकराचार्य के अद्वैत सिद्धांत की चर्चा व्यापक करने की जरुरत है।
दक्षिणामूर्ति पीठाधीश्वर स्वामी पूण्यानंद महाराज ने कहा कि आज धर्मांतरण मुख्य सामाजिक समस्या है। वैदिक सनातन धर्म के समानान्तर कोई धर्म नहीं है। वेद का अर्थ ही धर्म है। उन्होंने कहा कि वेदार्थ न जानने से व्यक्तियों में भ्रांति आयी है। हमारा दुर्भाग्य है कि हम वेद का धर्म का अध्ययन मनन करना छोड़ दिए इसलिए धर्मपथ से विचलित हुए हैं। इसके पहले संत समागम का शुभारंभ वेदांत भारती के संरक्षक श्री श्री शंकर भारती महाराज, निर्वाण पीठाधीश्वर राजगुरु स्वामी भारती महाराज,अटल पीठाधीश्वर स्वामी विश्वात्मानंद महाराज, आनन्द पीठाधीश्वर स्वामी बालकानंद महाराज एवं महामंडलेश्वर द्वय पुण्यानंद गिरी महाराज, स्वामी चिदम्बरानंद महाराज ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
उद्घाटन सत्र में ही स्वामी हरिबह्मद्रानंद तीर्थ महाराज, स्वामी निरगुणानंद गिरी महाराज, स्वामी परमानंद गिरी महाराज द्वारा रचित पुस्तक सन्यास प्रिंसिपल्स एंड प्रैक्टिक्सेस का विमोचन किया गया।