घुमंतू पशुपालकों की समस्याओं का निदान किया जाना आवश्यक : अवधेश कौशल

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ऋषिकेश, 25 मार्च (हि.स.)। उत्तराखंड सेंटर फॉर पेस्टोरलिस्म और वन गुर्जर ट्राइबल युवा संगठन द्वारा उत्तराखंड के वन गुर्जरों, घुमंतू पशुपालकों की संस्कृति और जीवन शैली पर आधारित दो दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन भी वन गुर्जरों की समस्याओं पर चर्चा हुई।

गंगा भोगपुर मल्ला कौड़िया गांव में शुरू हुए सम्मेलन के दूसरे दिन पद्म पुरस्कार से सम्मानित अवधेश कौशल ने कहा कि देश के सभी जंगलों में गुर्जरों के साथ घुमंतू पशु पालकों की समस्याओं के निवारण के लिए बने वन अधिकार कानून में वन निवासी आदिवासी समुदायों और अन्य पारंपरिक व निवासी समुदायों के वन संसाधनों पर अधिकारों की मान्यता दी गई है, जिसके प्रति सभी को जागरूक रहने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से जंगलों में रहकर अपने बच्चों का पालन पोषण कर रहे घुमंतू पशुपालकों की काफी समस्याएं हैं, जिन का निदान किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

सम्मेलन का संचालन कर रहे अमीर हमजा ने कहा कि हमारी संस्कृति और जीवन शैली के संबंध में आने वाली पीढ़ी को भी अवगत कराना चाहिए कि किस प्रकार उनके बुजुर्गों ने उन्हें पालने के लिए कष्टों को सहा है।

इस सम्मेलन में देश के पांच राज्य उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र ,गुजरात और यूपी से लगभग 300 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिसमें गुर्जर ट्राइबल युवा संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसकी पहल पर यह सम्मेलन आयोजित किया गया है।

कुमाऊं गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के उधम सिंह नगर एवं नैनीताल जनपद तथा गढ़वाल के हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग जनपद में पशुओं के संग स्थाई एवं अस्थाई रूप से प्रवास करने वालों की समस्याओं को लेकर इस सम्मेलन में चर्चा की गई। इस दौरान बताया गया कि 27 मार्च को कुनाओ चोड़ में पशु मेला भी लगाया जाएगा।