औषधि अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को शीर्ष पर पहुंचाना जरूरी : डॉ मुरली रामचंद्र

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लखनऊ, 14 मार्च (हि.स.)। औषधि अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को शीर्ष पर पहुंचाने की आवश्यकता है। भारत दुनिया की फार्मेसी तो बन गया है लेकिन औषधि अनुसंधान और विकास की स्थिति अभी भी विकास के चरण में ही है। यह बातें जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंस एंड रिसर्च बंगलूरू के डाॅ.मुरली रामचंद्र ने सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी” के तीसरे दिन वैज्ञानिक विचार-विमर्श के दौरान कही।

डॉ. मुरली रामचंद्र ने कहा कि औषधि अनुसंधान के इस क्षेत्र में भी शीर्ष पर पहुंचने के लिए न केवल देश बल्कि विश्व स्तर पर उद्योग और एकेडमिक संस्थाओं के बीच समन्वय बनाना होगा। ड्रग डिस्कवरी बायोलॉजी, मोनाश विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया की डॉ. सेलिन वैलेंट ने सिज़ोफ्रेनिया के उपचार के लिए तृतीय चरण के परीक्षणों में प्रवेश कर चुकी दवा जेनोमेलिन के बारे में जानकारी दी।

डॉ. सेलिन वैलेंट ने कहा कि सिज़ोफ्रेनिया एक गम्भीर मानसिक विकार है जो किसी व्यक्ति की स्पष्ट रूप से सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने की क्षमता को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि यदि उनका यह क्लीनिकल परीक्षण सफल होता है तो जेनोमेलिन एफडीए से अनुमोदित पहली एंटीसाइकोटिक दवा होगी।

मिंगहुई फार्मास्युटिकल लिमिटेड अमेरिका के डॉ. प्रभाकर जाधव ने पेट की बीमारी एब्डोमिनल एओर्टा एन्यूरिज्म के कारणों की चर्चा की। बताया कि यह रोग अधिक उम्र के पुरुषों और धूम्रपान करने वालों में आम है तथा अक्सर लक्षणों के बिना, धीरे-धीरे बढ़ता है। पीठ, पेट या वक्ष में दर्द अक्सर एओर्टा के अत्यधिक बदने या फटने का संकेत हो सकता है। संगोष्ठी का समापन डॉ. पी.एन. यादव और डॉ. दीपांकर कोले, आयोजन सचिव और आयोजन सह-सचिव के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।