माओवादी घटना में पकड़े गए महिला सहित दो आरोपित दोषमुक्त करार

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बांदा, 13 मार्च (हि.स.)। जनपद में महुआ विकास खंड के पतौरा गांव में सोमवार को खांटू श्याम जी का दिव्य दरबार सजेगा और कानपुर, लखनऊ समेत कई शहरों के बड़े-बड़े कलाकार संकीर्तन व भजन संध्या कार्यक्रम में शिरकत करके बाबा श्याम को मनाने का प्रयास करेंगे। दरबार में भजनों और संकीर्तन का आनंद उठाने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं के आगमन का सिलसिला शुरू हो गया है।

बांदा के पतौरा गांव में सोमवार को लगने वाले खांटू श्याम के भव्य और दिव्य दरबार को लेकर आयोजक मंडल ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। गांव की व्यवस्थाओं को दिव्य रूप देते हुए आयोजक मंडल ने विशाल पंडाल सजाया है और श्रद्धालुओं के बैठने का बेहतर इंतजाम किया है।

आयोजक मंडल के प्रमुख वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश त्रिपाठी और ग्राम प्रधान संगठन की अध्यक्ष व भाजपा महिला मोर्चा जिला मंत्री विनीता त्रिपाठी ने बताया कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं। बताया कि संकीर्तन और भजन संध्या के दौरान गुरसहायगंज कन्नौज से संदीप मस्ताना, कानुपर की शैफाली द्विवेदी, इटारसी की दीपाली यादव, कानपुर के अनुज अलबेला समेत तमाम कलाकार अपने भजन प्रस्तुत करके श्रद्धालुओं को भक्ति रस में गोते लगवायेंगे। जबकि कार्यक्रम के सफल संचालन का जिम्मा कानपुर के आशीष पंडित संभालेंगे।

कार्यक्रम के संयोजक मऊ, चित्रकूट के मनीष केसरवानी होंगे। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सफल बनाने के लिए श्रीमती रामसखी त्रिपाठी, भरतबाबू त्रिपाठी, गुलाब त्रिपाठी, पंकज त्रिपाठी, आलोक त्रिपाठी, अभिषेक त्रिपाठी, आदर्श त्रिपाठी, मृदुल त्रिपाठी आदि पूरे मनोयोग से जुटे हुए हैं।

बताया कि खांटू श्याम जी को हारे का सहारा माना जाता है और वह अपने भक्तों की रक्षा और संरक्षा के लिए हर समय तत्पर हैं। खांटू श्याम जी भक्त वत्सल भगवान कहे जाते हैं, फाल्गुन मास की एकादशी को भगवान खांटू श्याम के महत्वपूर्ण पर्वों में माना जाता है।

पतौरा गांव में भगवान खांटू श्याम का दरबार फाल्गुन मास की एकादशी के दिन सजाया जा रहा है, जिसका सभी श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा। कार्यक्रम में जिले के आला अधिकारी, जनप्रतिनिधि और आसपास के जिलों के साथ ही दूर-दूर के इलाकों से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए आयोजकों की तैयारियां अंतिम दौर में है।

हिन्दुस्थान समाचार/ अनिल

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माओवादी घटना में पकड़े गए महिला सहित दो आरोपित दोषमुक्त करार

District court aquint three persons, incciden               

-तहसील मुख्यालय में 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान कथित रूप से माओवादियों द्वारा घटना करना बताया गया था

नैनीताल, 13 मार्च (हि.स.)। प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोस्टर लगाने और लिखाई करने के आरोपित 5000 रुपये के इनामी कथित माओवादी देवेंद्र चम्याल और उसके साथ पकड़ी गई भगवती भोज को न्यायालय ने कल दोषमुक्त यानी बरी कर दिया। यह घटना नैनीताल के धारी तहसील मुख्यालय में 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान कथित रूप से माओवादियों द्वारा की बताई गई थी।

बताया गया कि मामले के अभियोजकों को आरोपितों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले। यह भी बताया गया कि मुख्य आरोपित देवेंद्र चम्याल वास्तव में काल्पनिक व्यक्ति निकला। क्योंकि जिस व्यक्ति को पकड़ा गया और जिस पर पूरा अभियोग चला वह देवेंद्र चम्याल नहीं बल्कि देव सिंह था।

नैनीताल जनपद की प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रीतु शर्मा की न्यायालय ने शनिवार को इस मामले में 40 पेज के अपने आदेश में कहा है कि अगर दोनों अन्य मामलों में वांछित नहीं हैं तो दोनों को तत्काल रिहा करें। मामले के अनुसार 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान 1 फरवरी 2017 को धारी तहसील मुख्यालय में गिरीश चंद्र ने शिकायत दर्ज कराई थी कि तहसील में एक गाड़ी पर आग लगा दी गयी और लाल रंग से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) और अन्य स्लोगन लिख दिए गए। साथ ही तहसील के बाहर भी पोस्टर डंडे पम्फलेट में माओवादी लिखा मिला।

इस शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में 23 सितंबर 2017 को चोरगलिया थाने में तैनात संजय जोशी ने आरोपित देवेंद्र चम्याल व भगवती भोज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। लंबी सुनवाई के बाद न्यायालय में पुलिस की कहानी नहीं चल सकी और न्यायालय ने दोनों आरोपितों को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। देवेंद्र सिंह चम्याल को रिहा करने और पहले से जमानत पर चल रही भगवती भोज को 6 माह तक के लिए सीआरपीसी की धारा 437ए के प्रावधानों के अंतर्गत रहने को कहा है।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता चंद्रशेखर करगेती ने बताया कि आरोपितों के विरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं पाया गया। केवल पुलिस कस्टली के दौरान उनके द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने के आधार पर यह मामला चला। देवेंद्र सिंह चम्याल वास्तव में देव सिंह चम्याल था। बचाव पक्ष की ओर से इस संबंध में उसका मतदाता पहचान पत्र व विद्यालय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। इस आधार पर उन्होंने तर्क दिया कि देवेंद्र सिंह चम्याल पुलिस द्वारा निर्मित व्यक्ति था और पुलिस ने जिसे पकड़ा गया वह देवेंद्र सिंह चम्याल नहीं था। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने पैरवी की।