गुरुकुल की यज्ञशाला में तांबे के विशाल यज्ञकुंड की हुई स्थापना

Share

हरिद्वार, 11 मार्च (हि.स.)। गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय की यज्ञशाला में शुक्रवार को तांबे के विशाल यज्ञकुंड की स्थापना की गई। इस अवसर पर आर्यसमाज के सभी पदाधिकारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस दौरान कुलपति ने कहा कि यज्ञ एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसके माध्यम से हम जड़ तथा चेतन देवों की पूजा करते हैं। पांच यज्ञों में देवयज्ञ सबसे महत्वपूर्ण है।

भारत सरकार की तरफ से ऑडिट करने आयी टीम की अध्यक्ष अमिता जैन ने ताम्र निर्मित यज्ञकुंड की स्थापना और उसमें प्रथम यज्ञ किया। उन्होंने कहा कि यज्ञ के समीप बैठकर भी एक नई ऊर्जा तथा शक्ति का संचार होता है। सारे दिन कार्य करने की निरन्तरता बनी रहती है और फिर भी थकान नहीं आती है। इस विश्वविद्यालय में तांबे के यज्ञकुंड की स्थापना करना मेरा सौभाग्य है।

इस अवसर पर भौतिक वैज्ञानिक के प्रोफेसर लक्ष्मी प्रसाद पुरोहित भी उपस्थित रहे। उन्होंने इस ताम्रकुंड का दान दिया है। साथ ही उन्होंने बताया कि इस तांबे की धातु से जल साफ होता है, यह बिजली का सुचालक होता है। तांबे का पात्र स्वास्थ्य के लिये उत्तम होता है।