सॉफ्टवेयर में हेरफेर कर दो करोड़ के जीपीएस उपकरण चोरी करने वाले दो कर्मचारी गिरफ्तार

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जयपुर, 01 नवंबर । कंपनी के सॉफ्टवेयर में हेरफेर कर फर्जी ऑनलाइन ऑर्डर जनरेट किए और करीब दो करोड़ रुपए कीमत के जीपीएस उपकरण चोरी कर बाजार में बेच दिए। सांगानेर सदर थाना पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए कंपनी के ही दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर 162 जीपीएस उपकरण, 103 एंटेना और 3.50 लाख रुपए नकद बरामद किए गए हैं। चोरी की रकम से खरीदा गया लैपटॉप, प्रिंटर, सिलाई मशीनें और ऑफिस की कुर्सियां भी जब्त की गई हैं।

पुलिस उपायुक्त दक्षिण राजर्षि राज ने बताया कि सीतापुरा रीको क्षेत्र स्थित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माता कंपनी रेवेन्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सार्थक जैन ने 29 अक्टूबर को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कंपनी के सॉफ्टवेयर में हेरफेर कर पुराने ग्राहकों की आईडी से फर्जी ऑनलाइन ऑर्डर जनरेट किए गए और बैंकिंग क्षेत्र में धन के लेन-देन के लिए इस्तेमाल होने वाले करीब दो करोड़ रुपए के जीपीएस उपकरण चोरी कर लिए गए। इन उपकरणों के दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई थी।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाधिकारी कमलेश कुमार शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस ने कंपनी के दो कर्मचारियों अजरुद्दीन उर्फ अजहर (22), निवासी हुमायुपुर, नजीबाबाद, बिजनौर (उत्तर प्रदेश), हाल निवासी कच्ची बस्ती ईदगाह, गलतागेट और मोहम्मद जैद (23), निवासी गुलजार कॉलोनी, ईदगाह गलतागेट को गिरफ्तार किया।

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि दोनों कंपनी में ग्राहक सहायता अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। उनके पास कंपनी के सॉफ्टवेयर का एक्सेस था। इसी का दुरुपयोग कर वे पुराने ग्राहकों की आईडी से ऑनलाइन ऑर्डर बुक करते और सॉफ्टवेयर में बदलाव कर सामान का डिलीवरी पता बदल देते थे। इसके बाद जीपीएस उपकरण हासिल कर उन्हें कम कीमत पर बाजार में बेच देते थे।

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर चोरी के 162 जीपीएस 8.0 उपकरण और इनके साथ इस्तेमाल होने वाले 103 एंटेना बरामद किए हैं। इसके अलावा 3.50 लाख रुपए नकद भी जब्त किए गए हैं। पुलिस के अनुसार चोरी के उपकरण बेचकर मिली रकम से खरीदा गया एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, सिलाई मशीनें और ऑफिस की कुर्सियां भी बरामद की गई हैं।

पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है कि चोरी के उपकरण किन-किन लोगों को बेचे गए और इस नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हैं।