काठमांडू, 31 अक्टूबर । संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नेपाल को अतिकम विकसित देश (एलडीसी) की श्रेणी से विकासशील देश में स्तरोन्नत होने के लिए तीन साल का अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है।
अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुई 81वीं महासभा की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इससे पहले 21 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) ने नेपाल को अतिरिक्त समय देने की सिफारिश महासभा से की थी।
महासभा ने नेपाल और बांग्लादेश को अतिकम विकसित देशों की सूची से बाहर निकलने की प्रक्रिया के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी करने का समय 24 नवंबर 2029 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया है। नेपाल के लिए पहले निर्धारित समयसीमा आगामी 24 नवंबर 2026 को समाप्त हो रही थी। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र के लिए नेपाल के स्थायी मिशन ने इसकी जानकारी दी।
इससे पहले, नेपाल को नवंबर 2021 तक अतिकम विकसित देशों की सूची से बाहर निकलना था। निर्धारित समय में ऐसा नहीं हो पाने और कोरोना महामारी के प्रभाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने पांच साल की मोहलत देते हुए 24 नवंबर 2026 तक का समय दिया था। अब इस अवधि को भी तीन साल के लिए बढ़ा दिया गया है।
इस फैसले से नेपाल को अतिकम विकसित देशों की सूची से बाहर निकलने से पहले जरूरी संरचनात्मक और संस्थागत सुधारों को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का अतिरिक्त समय मिला है।
नेपाल ने कहा है कि वह इस अवधि का उपयोग उत्पादन क्षमता बढ़ाने, संस्थागत ढांचे को मजबूत करने तथा आर्थिक और सामाजिक बदलाव को गति देने के लिए करेगा। इसके साथ ही विकासशील देश बनने के बाद सुचारु बदलाव सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई सहज संक्रमण रणनीति (स्मूथ ट्रांजिशन स्ट्रैटेजी), सतत विकास के लिए 2030 के एजेंडे और दोहा कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जाएगा।
नेपाल को उम्मीद है कि अतिरिक्त समय से अतिकम विकसित देशों की सूची से सुचारु, टिकाऊ और अपरिवर्तनीय रूप से बाहर निकलने का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
संयुक्त राष्ट्र में नेपाल के स्थायी मिशन ने इस फैसले के लिए संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के निरंतर सहयोग, एकजुटता और समर्थन के प्रति आभार व्यक्त किया है।
संयुक्त राष्ट्र ने अतिकम विकसित देशों की श्रेणी से बाहर निकलने के लिए तीन मानदंड निर्धारित किए हैं। इनमें प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय कम से कम 1306 डॉलर, मानव संपत्ति सूचकांक कम से कम 66 और आर्थिक एवं पर्यावरणीय जोखिम सूचकांक अधिकतम 32 होना चाहिए।
नेपाल की प्रति व्यक्ति आय 1535 डॉलर, मानव संपत्ति सूचकांक 77.58 और आर्थिक एवं पर्यावरणीय जोखिम सूचकांक लगभग 29 है। इस तरह नेपाल निर्धारित मानदंडों को पूरा कर चुका है। हालांकि, विकासशील देश बनने के बाद आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति अभी अनुकूल नहीं थी। इसी वजह से समयसीमा बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया था।
मुख्य रूप से अगस्त 2025 में हुए जेन-जी आंदोलन के प्रभाव के बाद नेपाल ने अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था। निर्धारित मानदंड पूरे होने के बावजूद राजनीतिक और आर्थिक स्थिति अस्थिर थी। स्तरोन्नति के बाद आने वाली चुनौतियों का सामना करने और नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए पर्याप्त आधार तैयार नहीं हो पाया था। इसी को देखते हुए नेपाल ने स्तरोन्नति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव किया था।
जेन-जी आंदोलन के बाद नेपाल को बार-बार प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना करना पड़ा। माना जा रहा है कि इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है।
विकासशील देश बनने के बाद नेपाल को व्यापार में मिल रही कुछ सुविधाएं समाप्त हो जातीं। इसके अलावा अनुदान प्राप्त करने में कठिनाई होती और ऋण पर ब्याज दरें महंगी हो सकती थीं। नेपाल इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अभी पूरी तरह तैयार नहीं था।
ऐसी स्थिति में नेपाल के विकासशील देश बनने के बाद दोबारा कम विकसित देशों की श्रेणी में आने का जोखिम भी था। इसलिए टिकाऊ और स्थायी स्तरोन्नति सुनिश्चित करने के लिए समयसीमा बढ़ाना जरूरी समझा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र का यह निर्णय स्वागतयोग्य है।
