गलियों में गुमनाम पड़ी पुरातात्विक धरोहर, अब तक नहीं ली किसी ने सुध

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धमतरी, 28 अक्टूबर । छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला शहर केे हटकेशर वार्ड में नागसागर तालाब के पास संकरी गली में वर्षों से एक पुरातात्विक धरोहर खुले आसमान के नीचे उपेक्षित अवस्था में खड़ी है। धूप, बारिश और समय के थपेड़ों ने भले ही इसकी चमक फीकी कर दी हो, लेकिन इसकी मौजूदगी आज भी लोगों के लिए कौतूहल और जिज्ञासा का विषय बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि पीढ़ियों से मौजूद इस ऐतिहासिक संरचना के बारे में अब तक न तो कोई ठोस जानकारी सामने आई है और न ही इसके संरक्षण की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है।

स्थानीय बुजुर्ग सोनसाय देवांगन, रामलाल देवांगन बताते हैं कि वे इस धरोहर को अपने बचपन से देखते आ रहे हैं। उनके दादा भी इसे अपने बचपन से इसी स्थान पर मौजूद बताते थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह संरचना कई पीढ़ियों से यहां खड़ी है, लेकिन इसके इतिहास और महत्व पर कभी गंभीरता से प्रकाश नहीं डाला गया। बुजुर्गों के अनुसार नागसागर तालाब पहले से ही अस्तित्व में था और यहां ग्राम देवता स्नान से पूर्व अखरा खेलते थे।

कुछ स्थानीय लोगों का अनुमान है कि संभवतः किसी राजा या जमींदार ने इस संरचना की स्थापना कराई होगी, हालांकि इसकी पुष्टि करने वाला कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है। आसपास न तो कोई भव्य मंदिर है और न ही ऐसा संरक्षित परिसर, जिससे इसके निर्माण के उद्देश्य और कालखंड का पता चल सके।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह धरोहर लंबे समय से खुले में उपेक्षित पड़ी है। इसके संरक्षण के लिए न तो चबूतरे की व्यवस्था की गई है और न ही इसके ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देने वाला कोई सूचना पट्ट लगाया गया है। ऐसे में नई पीढ़ी के लिए यह केवल एक रहस्यमयी पत्थर की मूर्ति या संरचना बनकर रह गई है, जबकि संभव है कि इसके भीतर धमतरी के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां छिपी हों।

वार्डवासियों के मुताबिक, समय-समय पर यह धरोहर समाचार पत्रों की सुर्खियों में भी आती रही है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित प्रशासन और पुरातत्व विभाग की ओर से अपेक्षित पहल नहीं की गई। नागरिकों की मांग है कि विशेषज्ञों की टीम से इस संरचना का सर्वेक्षण कराया जाए, इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का पता लगाया जाए और आवश्यक संरक्षण के उपाय किए जाएं। इससे न केवल इस धरोहर की पहचान सामने आ सकेगी, बल्कि धमतरी के इतिहास के किसी महत्वपूर्ण अध्याय पर से पर्दा उठने की संभावना भी बनेगी। फिलहाल यह प्राचीन संरचना गली के एक कोने में खामोशी से खड़ी अपने अतीत की गवाही दे रही है। इस संबंध में

हटकेश्वर वार्ड पार्षद सूरज गहरवाल ने बुधवार को जानकारी देते हुए कहा कि वार्ड की गलियों में बिखरी पड़ी ऐतिहासिक धरोहरों को सहजने के लिए प्रयास जारी है। इसके संबंध में बाकायदा जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया गया है। उम्मीद है आने वाले दिनों में इन धरोहरों को सुरक्षित किया जाएगा।