वंदे मातरम् के सभी छंद अनिवार्य करने के आदेश को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

Share

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर । उच्चतम न्यायालय ने वंदेमातरम् के सभी छंदों को अनिवार्य रूप से गाने के सरकारी आदेश और कानून को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई की। उच्चतम न्यायालय ने इन नई याचिकाओं को पहले से लंबित टीएम कृष्णा की याचिका के साथ जोड़ दिया है। इस पूरे मामले पर अब अगली विस्तृत सुनवाई 30 नवंबर को होगी।

न्यायालय बीडी बोरकर और बीएस मावोजी की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह आदेश पिछले 79 वर्षों से चले आ रहे केवल शुरुआती दो छंदों को गाने की गैर-धार्मिक परंपरा को अवैध रूप से बदलता है। याचिका में तर्क दिया गया है कि आनंदमठ के पूरे छह छंदों वाले संस्करण में विशिष्ट धार्मिक संदर्भ, जैसे हिंदू देवियों का आह्वान शामिल है। किसी को भी इसे गाने के लिए मजबूर करना उसकी अंतरात्मा और धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) का उल्लंघन है।

इससे पहले प्रसिद्ध कर्नाटक संगीत गायक टीएम कृष्णा ने भी ऐसी ही एक याचिका दायर की थी, जिसमें आखिरी चार छंदों की अनिवार्यता को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि इस संशोधन के तहत ‘वंदे मातरम्’ गाने से जानबूझकर रोकना या इसे गाते समय किसी सभा में बाधा डालना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए तीन साल तक की जेल हो सकती है। याचिका में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण संशोधन कानून की धारा 3 पर सवाल उठाया गया है।

उच्चतम न्यायालय ने 22 सितंबर को टीएम कृष्णा की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा था कि जो व्यक्ति ‘वंदे मातरम्’ के सभी पद नहीं गाता, उस पर आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।