देहरादून, 23 अक्टूबर । मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को ठोस और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों के साथ अधिक पर्यटकों की आवाजाही वाले ग्रामीण पर्यटन स्थलों पर भी कचरे के प्रबंधन के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शुक्रवार को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन राज्य स्तरीय कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति (शहरी विभाग) की बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। बैठक में स्वच्छ उत्तराखंड मिशन 2026-2030 की कार्ययोजना और विभिन्न स्थानों पर संचालित अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नए नियमों के अनुपालन के लिए व्यापक और व्यावहारिक कार्ययोजना तथा नियमावली तैयार की जाए। इसमें निजी संस्थानों, औद्योगिक संगठनों और अधिक मात्रा में कचरा उत्पन्न करने वाले प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की जाएं। उन्होंने कहा कि संबंधित शहरी निकायों, ग्राम पंचायतों और अन्य क्रियान्वयन संस्थाओं की भूमिका तय करते हुए ऐसा मॉडल विकसित किया जाए, जिसे प्रदेशभर में लागू किया जा सके।
बैठक में अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि नए नियमों में प्रवर्तन, निगरानी और चालान की कार्रवाई से संबंधित प्रावधानों को अधिक प्रभावी बनाया गया है। इनमें विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर), संबंधित पोर्टल पर कार्रवाई का विवरण अपलोड करने, लैंडफिल में पहुंचने वाले कचरे की मात्रा कम करने तथा वैज्ञानिक निस्तारण और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि नियमों के अनुपालन के लिए शहरी निकायों, ग्राम पंचायतों और अन्य संबंधित संस्थाओं के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि नियमों को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि धरातल पर उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए नियमित निगरानी, जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई की व्यवस्था की जाए।
उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन की लंबित और जारी परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कचरे के पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण की व्यवस्था मजबूत करने को कहा। शैक्षणिक और कौशल विकास संस्थानों में भी स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल व्यवहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित कार्ययोजना और नियमावली में सभी जरूरी प्रावधान शामिल कर उसे मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य प्रदेश में ठोस और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाना है। बैठक में सचिव नितेश झा, रणवीर सिंह चौहान सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
