(संशोधित) दवा कंपनियों की अनैतिक गतिविधियों पर लगेगा अंकुश, केंद्र ने गठित की समिति

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नई दिल्ली, 23 अक्टूबर । दवा कंपनियों की मार्केटिंग में अनैतिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक समिति का गठन किया है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग की ओर से गठित यह समिति दवा कंपनियों और स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच होने वाले व्यावसायिक संपर्कों से जुड़े मौजूदा नियमों की व्यापक समीक्षा करेगी। समिति को अपनी पहली बैठक की तारीख से दो महीने के भीतर सिफारिशें सौंपनी होंगी।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके सदस्यों में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन और मेदांता के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहान शामिल हैं।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि समिति दवा कंपनियों की मार्केटिंग से जुड़ी अनैतिक गतिविधियों की पहचान करने के साथ मौजूदा निगरानी, नियंत्रण और नियमों के अनुपालन की व्यवस्था की प्रभावशीलता का आकलन करेगी। इसका उद्देश्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना तथा नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना है।

समिति यह भी विचार करेगी कि मौजूदा नियामकीय ढांचे को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कानूनी या वैधानिक प्रावधानों की जरूरत है या नहीं। इसके लिए वह संबंधित पक्षों, तकनीकी एवं पेशेवर विशेषज्ञों और संस्थानों से विचार-विमर्श करेगी। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद समिति अपनी सिफारिशें देगी।

दवा कंपनियों की मार्केटिंग में नैतिक मानकों को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2015 में यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (यूसीपीएमपी) लागू किया गया था। शुरुआत में यह उद्योग आधारित स्वैच्छिक स्व-नियमन व्यवस्था थी। इसका उद्देश्य दवा कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों को नैतिक मानकों के अनुरूप बनाना और कंपनियों तथा स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच होने वाले संपर्कों को नियंत्रित करना था।

बाद में औषध विभाग ने यूसीपीएमपी-2024 लागू किया, जिसने 2015 के कोड का स्थान लिया और इसके क्रियान्वयन की व्यवस्था को मजबूत किया। फिलहाल यही कोड लागू है।

नई समिति यह आकलन करेगी कि मौजूदा व्यवस्था अनैतिक मार्केटिंग गतिविधियों को रोकने में कितनी प्रभावी है और इसकी निगरानी एवं अनुपालन प्रणाली में क्या सुधार किए जा सकते हैं। समिति की सिफारिशों से दवा क्षेत्र में नैतिक व्यावसायिक व्यवहार को बढ़ावा देने और नियामकीय निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने के उपाय सुझाए जाने की उम्मीद है।