तारिक रहमान के जापान दौरे में बंगाल की खाड़ी को लेकर भारत की भूमिका हो सकती है अहम मु्द्दा

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ढाका, 22 अक्टूबर । बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित जापान यात्रा के दौरान बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में भारत की भूमिका एक अहम मुद्दा बन सकती है। जापान इस दौरान ‘बे ऑफ बंगाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ बेल्ट’ (बिग-बी) पहल में भारत को फिर से शामिल करने पर जोर दे सकता है। इस पहल का उद्देश्य बांग्लादेश, भारत और आसपास के क्षेत्रों के बीच औद्योगिक विकास, व्यापार और परिवहन संपर्क को मजबूत करना है।

बांग्लादेश के अंग्रेजी अखबार ‘द डेली स्टार’ ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से बताया कि आगामी 26 से 29 अक्टूबर तक प्रस्तावित तारिक रहमान की टोक्यो यात्रा के दौरान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा की संभावना है। जापान की यह पहल उसके व्यापक फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (एफओआईपी) दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके तहत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक सहयोग, स्थिरता और संपर्क को बढ़ावा दिया जाता है।

गाैरतलब है कि बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद ढाका और भारत के संबंधों में कई चुनौतियां सामने आईं। इन राजनीतिक बदलावों ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में जापान की कनेक्टिविटी योजनाओं को भी प्रभावित किया है।

वहीं, जापानी अधिकारियों का मानना है कि भारत के पूर्वोत्तर और बांग्लादेश के बीच बेहतर परिवहन संपर्क से व्यापार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है। भारत पहले ही अपने पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम कर रहा है। जापान ने भी पूर्वोत्तर भारत में बड़े पैमाने पर विकास कार्यों के लिए सहायता दी है। ऐसे में भारत, बांग्लादेश और जापान के बीच सहयोग बंगाल की खाड़ी को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय आर्थिक केंद्र बनाने में मदद कर सकता है।

उल्लेखनीय है कि जापान ने वर्ष 2014 में ‘बे ऑफ बंगाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ बेल्ट’ पहल शुरू की थी। इसका शुरुआती उद्देश्य बांग्लादेश के ढाका, चट्टोग्राम और कॉक्स बाजार कॉरिडोर पर था। इसमें औद्योगिक विकास को गति देना, जापानी निवेश आकर्षित करना और परिवहन नेटवर्क को बेहतर बनाना है। बिग-बी पहल मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर केंद्रित है जिसमें नए औद्योगिक केंद्रों का विकास और निवेश को प्रोत्साहन देना, ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना। इसके अलावा बंदरगाहों, सड़कों और अन्य परिवहन सुविधाओं के जरिए क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाना।

वहीं, जापान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस यात्रा से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध मजबूत होने और मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस यात्रा के दौरान बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान भी प्रधानमंत्री के साथ जाएंगे या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। विदेश सचिव असद आलम सियाम ने कहा कि कार्यक्रमों में तालमेल होने पर विदेश मंत्री भी यात्रा में शामिल हो सकते हैं।