कैथल, 21 अक्टूबर । परिवार की गरीबी दूर करने और बेहतर भविष्य के सपने लेकर अमेरिका गए गांव टयोंठा के 26 वर्षीय अजय चौधरी का शव बुधवार को गांव पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। जिस बेटे को परिवार ने कर्ज लेकर विदेश भेजा था, उसकी अर्थी को कंधा देते समय परिजनों की आंखें नम थीं। गांव के लोगों और रिश्तेदारों ने परिवार को ढांढस बंधाया। सामाजिक संस्थाओं, दोस्तों और रिश्तेदारों के सहयोग से अजय का शव भारत लाया जा सका। गांव की परंपराओं के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया गया। चचेरे भाई चिराग ने उसे मुखाग्नि दी।अजय की करीब 15 दिन पहले अमेरिका में ब्रेन हेमरेज के कारण मौत हो गई थी। वह लगभग तीन साल पहले अमेरिका गया था और शिकागो में रहकर एक राशन स्टोर पर काम करता था। जानकारी के अनुसार, अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसके साथियों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। विदेश में हुई इस अनहोनी की खबर ने परिवार की उम्मीदों को गहरे सदमे में बदल दिया।अजय के चाचा विनोद कुमार ने बताया कि परिवार ने उसे बेहतर भविष्य की उम्मीद में करीब 42 लाख रुपये खर्च कर अमेरिका भेजा था। इतनी बड़ी रकम जुटाने के लिए परिवार ने अपनी बचत लगाने के साथ दोस्तों और रिश्तेदारों से भी पैसे उधार लिए थे। अजय वहां मेहनत करके कमाई कर रहा था ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर सके।परिवार को उम्मीद थी कि अजय विदेश में काम करके घर की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाएगा और धीरे-धीरे कर्ज चुकाने में मदद करेगा, लेकिन उसकी असमय मौत ने परिवार को ऐसा दुख दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। अब परिजनों के सामने बेटे को खोने का दर्द और विदेश भेजने के लिए जुटाई गई बड़ी रकम का आर्थिक बोझ भी है।अजय का परिवार गांव में ही रहता है। चाचा विनोद कुमार के अनुसार, परिवार के पास करीब पौना एकड़ जमीन है, जिस पर खेती करके गुजारा किया जाता है। परिवार में पिता धर्म सिंह, मां रेखा रानी और अजय की छोटी बहन है। सीमित जमीन और आर्थिक संसाधनों के बीच परिवार ने बेटे को इस उम्मीद के साथ विदेश भेजा था कि उसकी कमाई से घर के हालात बेहतर होंगे। बुधवार को अजय की अंतिम यात्रा में गांव टयोंठा के लोगों के साथ आसपास के गांवों के ग्रामीण और सामाजिक संस्थाओं के सदस्य भी शामिल हुए। जिस युवक के भविष्य को लेकर परिवार ने बड़े सपने संजोए थे, उसे अंतिम विदाई देते समय पूरे गांव में शोक का माहौल रहा।
