अनूपपुर: ऐतिहासिक धरोहर की अनदेखी: 12वीं सदी के गाज मंदिर बना मयखाना, चारों ओर शराब की बोतलें और गंदगी

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अनूपपुर, 16 अक्टूबर । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की 12वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर गाज मंदिर के अवशेष जिला मुख्यालय में नगर पालिका कार्यालय स्थित लाडली लक्ष्मी पार्क में बदहाल हैं। वर्ष 2016-17 में पुरातत्व विभाग ने मूल स्थल से लाकर इन अवशेषों को यहां पुनर्स्थापित किया था, ताकि कल्चुरीकालीन मंदिर की विरासत को सहेजा जा सके। लेकिन रखरखाव के अभाव में मंदिर की दीवारों पर काई जम रही है, आसपास झाड़ियां उग आई हैं और परिसर में शराब की टूटी बोतलें व अन्य कचरा बिखरा पड़ा है। यहां तक पहुंचने के लिए रास्ता भी नहीं बनाया गया है। जानकारी देने पर नपाधिकारी ने ने साफ-सफाई कराने की बात कहीं।

नगर पालिका कार्यालय स्थित लाडली लक्ष्मी पार्क में रखे मंदिर के अवशेषों के आसपास सफाई नहीं होने से झाड़ियां फैल गई हैं। एकांत में होने से लोगो के लिए शराब खोरी के लिए उपयुक्त स्थान बना हुआ हैं, जगह-जगह शराब की टूटी बोतलें, पानी के पाउच और अन्य कचरा पड़ा है। दीवारों पर काई जमने लगी है। मूल मंदिर स्थल से लाए गए कुछ पत्थर भी पास में असुरक्षित पड़े हैं। ऐसे में ऐतिहासिक धरोहर को देखने आने वाले लोगों के लिए यहां तक पहुंचना भी आसान नहीं है।

गाज मंदिर मूल रूप से पुष्पराजगढ़ तहसील के कोयलारी टोला में बेनीबारी के पास नर्मदा नदी के तट पर ऊंची पहाड़ी पर स्थित था। इसे कल्चुरीकालीन 12वीं सदी का शिव मंदिर माना जाता है। मान्यता है कि बारिश के दौरान बार-बार आकाशीय बिजली गिरने से मंदिर क्षतिग्रस्त होता रहा और समय के साथ धराशायी हो गया। मंदिर के पुनर्निर्माण का प्रयास भी किया गया, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण यह संभव नहीं हो सका।

वर्ष 2014 में तत्कालीन कलेक्टर नंदकुमारम ने कोयलारी में अस्तित्व खोते जा रहे मंदिर के संरक्षण के प्रयास किए। इसके बाद पुरातत्व विभाग ने 10 वर्ष पूर्व वर्ष 2016-17 में मंदिर के बचे हुए अवशेषों को अनूपपुर जिला मुख्यालय स्थित लाडली लक्ष्मी पार्क में पुनर्स्थापित किया। राजस्थान के कारीगरों की मदद से इसके जीर्णोद्धार का काम भी किया गया था। लेकिन मूल मंदिर जैसी भव्य संरचना दोबारा तैयार नहीं हो सकी।

गाज मंदिर को पूर्वमुखी सप्तरथी मंदिर बताया जाता है। इसके दाहिनी ओर रथ पर सवार नरसिंह भगवान की मूर्ति है, जिनके दाहिने हाथ में चक्र और बाएं हाथ में शंख दर्शाया गया है। देवकोष्ठ में शिव और विष्णु के संयुक्त स्वरूप हरिहर की खड़ी प्रतिमा है। इसमें बाईं ओर गरुड़ और दाईं ओर नंदी की आकृतियां हैं। मंदिर के मुख्य रथ के दोनों ओर देवी, शार्दुल और नायिकाओं की प्रतिमाएं उत्कीर्ण हैं। दीवारों और बचे हुए अवशेषों पर की गई नक्काशी इसकी प्राचीन कला और भव्यता को दर्शाती है।

मंदिर के अवशेष नगरपालिका कार्यालय परिसर के पास होने के बावजूद देखरेख के अभाव में बदहाल पर अनूपपुर नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि स्थल की सफाई कराई जाएगी और आसपास उगी जंगली झाड़ियों को भी हटाया जाएगा।