अनूपपुर, 06 अक्टूबर । द्वारका-शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि अमरकंटक सहित देश के धार्मिक और तीर्थ क्षेत्रों का विकास करते समय उनकी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और धार्मिक स्वरूप का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। विकास के नाम पर ऐसी संरचनाओं का निर्माण नहीं होना चाहिए, जिससे तीर्थ की आध्यात्मिक पहचान प्रभावित हो। तीर्थ क्षेत्रों में विकास यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं तक सीमित रहना चाहिए। तीर्थ को तीर्थ ही रहने देना चाहिए, उसे केवल पर्यटक स्थल के रूप में विकसित नहीं किया जाना चाहिए।
