राजस्थान में बढ़ा डिजिटल शिक्षा का दायरा, गांव-ढाणी तक पहुंच रहा तकनीक आधारित शिक्षण

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जयपुर, 30 सितम्बर । राजस्थान में डिजिटल शिक्षा का नेटवर्क तेजी से मजबूत हुआ है। सुदूर गांव-ढाणी से लेकर शहरों तक स्मार्ट क्लास रूम, कम्प्यूटर सुविधा एवं इंटरनेट कनेक्टिविटी का ऐसा डिजिटल ढांचा तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से छात्र उच्च गुणवत्ता एवं तकनीक-आधारित आधुनिक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।राज्य में 17 हजार 247 विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम विकसित किए गए हैं, जबकि 29 हजार 291 विद्यालयों में कम्प्यूटर सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इनमें 26 हजार 940 विद्यालय ग्रामीण और 2,351 शहरी क्षेत्र के हैं। इसी तरह 42 हजार 763 ग्रामीण और 2,781 शहरी विद्यालयों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

स्मार्ट क्लासरूम में ऑडियो, वीडियो, एनिमेशन और मल्टीमीडिया सामग्री के माध्यम से विद्यार्थियों को विषयों को समझने के अधिक अवसर मिल रहे हैं। सरकार का जोर केवल तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षकों को भी डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 1 लाख 2 हजार 7 अध्यापकों को डिजिटल टीचिंग मेथडोलॉजी का प्रशिक्षण दिया गया।

डिजिटल शिक्षा का विस्तार स्मार्ट क्लासरूम और कम्प्यूटर तक ही सीमित नहीं है। उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 6,911 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 565 सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) लैब क्रियाशील हैं। स्ट्रेंथनिंग टीचिंग-लर्निंग एंड रिजल्ट्स फॉर स्टेट्स (STARS) योजना के तहत 501 रोबोटिक्स लैब स्थापित की गई हैं, जहां विद्यार्थियों को रोबोटिक्स मॉडल किट और डू इट योरसेल्फ (DIY) किट के माध्यम से गतिविधि आधारित एवं विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा 15,070 उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 4TB की हार्ड ड्राइव उपलब्ध कराई गई है, जिसमें कक्षा 9 से 12 तक के विभिन्न विषयों के ई-कक्षा वीडियो उपलब्ध हैं।

दूरस्थ विद्यालयों के विद्यार्थियों को डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2025-26 में 500 पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) विद्यालयों में प्री-लोडेड ई-कंटेंट के साथ डिजिटल लाइब्रेरी संचालित की जा रही है। विज्ञान विषय में शिक्षकों की कमी वाले 185 राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों के 16,732 विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन टीचिंग सपोर्ट कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। इसमें लाइव और रिकॉर्डेड कक्षाओं के साथ शैक्षणिक सहायता, नियमित मूल्यांकन, करियर मार्गदर्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित समाधान उपलब्ध कराने की योजना है। इंटरनेट कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए बीएसएनएल के साथ समझौते की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

आने वाले समय में डिजिटल शिक्षा का नेटवर्क और व्यापक करने की योजनाएं भी तैयार हैं। समग्र शिक्षा, पीएम श्री, STARS, बजट घोषणा और जन-सहभागिता योजना के तहत कुल 7,226 ICT लैब स्वीकृत हैं, जिनकी निविदा प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 8,994 नए स्मार्ट क्लासरूम की स्थापना के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। विद्यार्थियों के लिए 80,682 टैबलेट स्वीकृत किए गए हैं। बजट घोषणा 2026-27 के तहत 1,000 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पर्सनलाइज्ड अडैप्टिव लर्निंग (PAL) लैब विकसित करने की योजना है, जिनमें पहले चरण के 500 विद्यालयों का चयन प्रक्रियाधीन है। इन लैब के माध्यम से कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को उनकी क्षमता के अनुरूप क्लाउड आधारित ई-कंटेंट उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

डिजिटल शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को नई तकनीकी दक्षताओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। पीएम श्री की वार्षिक कार्ययोजना 2026-27 में 649 विद्यालयों में साइबर क्लब बनाने का प्रावधान है। इन क्लबों में विद्यार्थी साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक परियोजनाओं पर काम करेंगे। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पहचान और उन्हें मंच देने के लिए विद्यालय, जिला और राज्य स्तर पर ICT टेकफेस्ट आयोजित किए जाएंगे, जिसके लिए 94 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

विद्यालयों में तकनीकी संसाधनों के साथ सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने पर भी काम हो रहा है। 2,156 विद्यालयों में CCTV कैमरे लगाने के कार्यादेश जारी किए गए हैं। वहीं राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों और आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की उपस्थिति के लिए फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) आधारित व्यवस्था लागू करने की योजना है। इस तरह डिजिटल शिक्षा का दायरा अब केवल स्मार्ट क्लास तक सीमित न रहकर ई-कंटेंट, AI, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, डिजिटल लाइब्रेरी और ऑनलाइन शिक्षण तक फैल रहा है।

केंद्र सरकार भी समग्र शिक्षा अभियान के तहत डिजिटल शिक्षा के विस्तार के लिए वित्तीय सहायता दे रही है। वर्ष 2025-26 में देशभर के विद्यालयों में ICT लैब, स्मार्ट क्लासरूम और अन्य डिजिटल पहलों के लिए 3,221 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया गया। डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग (DIKSHA) और पीएम ई-विद्या जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी शिक्षण सामग्री तक पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर कहते हैं- “सरकार का लक्ष्य गांव-ढाणी के बच्चों को भी तकनीक के साथ आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल सामग्री के माध्यम से पारंपरिक कक्षा शिक्षण को तकनीक से जोड़ा जा रहा है, ताकि विद्यार्थी केवल रटने के बजाय विषयों को समझकर सीखें। दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थी भी अब ऐसी शैक्षणिक सामग्री तक पहुंच बना सकते हैं, जो पहले मुख्य रूप से शहरी विद्यालयों में उपलब्ध थी।”

दिलावर ने कहा- “डिजिटल शिक्षा के अगले चरण में ICT लैब, रोबोटिक्स, AI आधारित PAL लैब, साइबर क्लब और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि कोई भी विद्यालय डिजिटल सुविधाओं से वंचित नहीं रहे और विद्यार्थियों को बदलती तकनीक के अनुरूप आवश्यक ज्ञान एवं कौशल मिल सके।”