जयपुर, 08 सितंबर । राजस्थान उच्च न्यायालय ने 27 साल पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से रिटायर याचिकाकर्ता को दो सप्ताह में पेंशन सहित अन्य परिलाभ ब्याज सहित अदा करने को कहा है। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस चन्द्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश मातादीन गर्ग की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि यदि किसी दस्तावेज पर याचिकाकर्ता के हस्ताक्षर जरूरी हैं तो उसकी उम्र को ध्यान में रखते हुए रजिस्ट्री के अधिकारी को उनके निवास पर भेजकर हस्ताक्षर कराए गए। अदालत ने कहा कि यदि तय अवधि में बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो याचिकाकर्ता को 12 फीसदी ब्याज सहित भुगतान किया जाएगा और इस अतिरिक्त राशि की वसूली संबंधित अधिकारी से की जाएगी।
याचिका में अधिवक्ता सोगत रॉय ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता मार्च, 1999 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से रिटायर हुआ था। रिटायर होने के दो साल तक सरकारी भवन खाली नहीं करने पर संपदा निदेशक से हाईकोर्ट प्रशासन को पत्र लिखा था। जिसमें कहा गया था कि उसकी ग्रेच्युटी में से 57 हजार 454 रुपए काटकर शेष राशि जारी कर दी जाए। इसके बावजूद भी याचिकाकर्ता को 27 साल बीतने के बाद भी याचिकाकर्ता को शेष बकाया राशि और पेंशन जारी नहीं दी गई। इस संबंध में याचिकाकर्ता की ओर से संबंधित अधिकारियों को कई बार अभ्यावेदन भी दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता 81 साल का सीनियर सिटीजन है और ग्रेच्युटी राशि रुकने से वह प्रभावित हो रहा है। ऐसे में उसे बकाया राशि दिलाई जाए। जिसके जवाब में हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता की सेवा अवधि करीब आठ साल की ही रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता केवल अपनी रैंक के अनुसार वरिष्ठता के अधिकार होंगे और सेवा में शामिल होने से पूर्व किसी भी वेतन के हकदार नहीं होंगे। याचिकाकर्ता की सेवा अवधि दस साल से कम होने के कारण वह पेंशन और ग्रेच्युटी की पात्रता को पूरी नहीं करता है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को पेंशन सहित अन्य परिलाभ जारी करने को कहा है।