डूंगरपुर, 05 सितंबर । नगर परिषद क्षेत्र में बहुचर्चित फर्जी पट्टा जारी करने के गंभीर मामले का डूंगरपुर कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पर्दाफाश किया है। फर्जी पट्टे तैयार कर सीधे-साधे लोगों को चूना लगाने वाले तीन सदस्यीय गिरोह को गिरफ्तार किया गया है, जिसका मास्टरमाइंड नगर परिषद का ही एक पूर्व संविदाकर्मी निकला। आरोपिताें ने अब तक 30-35 लोगों को फर्जी पट्टे जारी कर लाखों रुपये हड़पने की बात स्वीकार की है। पुलिस ने आरोपिताें के पास से आधा दर्जन फर्जी पट्टे, लैपटॉप एवं अन्य उपकरण बरामद किए हैं।
मामले की शुरुआत तब हुई जब नगर परिषद आयुक्त ललित सिंह देथा के समक्ष बलवंत सिंह भाटी निवासी वसुंधरा बिहार आवासीय योजना, डूंगरपुर नगर परिषद कार्यालय में अपने नाम से जारी एक पट्टा जमा कराने पहुंचे। नगर परिषद के भूमि शाखा प्रभारी, कनिष्ठ अभियंता एवं कैश शाखा प्रभारी द्वारा जब दस्तावेज की गहनता से जांच की गई, तो बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। पट्टे पर आयुक्त एवं कनिष्ठ अभियंता के जाली हस्ताक्षर थे, रसीद के अनुसार राशि कोष में जमा नहीं थी, और न ही कार्यालय के ऑनलाइन या ऑफलाइन रिकॉर्ड व जावक पंजिका में इसका कोई इंद्राज था। गंभीर अनियमितता पाए जाने पर आयुक्त देथा की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली में प्रकरण दर्ज किया गया।
पुलिस द्वारा संदिग्ध बलवंत सिंह से पूछताछ करने पर पूरे गिरोह का ताना-बाना खुलकर सामने आ गया। पूछताछ में सामने आया कि बलवंत सिंह ने अपनी जमीन का पट्टा बनवाने के लिए राजू खराड़ी से संपर्क किया था। राजू खराड़ी ने पट्टा बनवाने के नाम पर 1,50,000 रुपये लिए। इसके बाद राजू खराड़ी ने नगर परिषद के पूर्व संविदाकर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर वंदित वैरागी और कोर्ट में प्राइवेट टाइपिंग का काम करने वाले नरेश कोटेड के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
मास्टरमाइंड वंदित बैरागी पूर्व में नगर परिषद में संविदा पर कार्यरत था। काम में लापरवाही व गंभीर शिकायतों के कारण तत्कालीन आयुक्त ने इसे नौकरी से निकाल दिया था। नगर परिषद की कार्यप्रणाली से भली-भांति परिचित होने के कारण इसने नौकरी से हटाए जाने से पहले ही कार्यालय से ब्लैंक शीट पेपर, पट्टे का प्रारूप, सील-मोहरें और आयुक्त के नमूना हस्ताक्षर चुरा लिए थे। वंदित ही पट्टों पर पूर्व आयुक्त प्रकाश डूडी के फर्जी दस्तखत करता था।
वहीं, राजू खराड़ी कोर्ट में स्टाम्प वेंडर और फाइल तैयार करने का काम करता है। यह ऐसे सीधे-साधे लोगों को फंसाता था, जिनके पट्टे नहीं बने होते थे तथा नरेश कोटेड कोर्ट परिसर में अपने निजी लैपटॉप से टाइपिंग का काम करता है। यह अपने लैपटॉप पर फर्जी पट्टे टाइप कर प्रिंट निकालता था और उन पर कनिष्ठ अभियंता प्रकाश महावर के फर्जी हस्ताक्षर करता था।
प्रारंभिक पूछताछ में तीनों अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि उन्होंने शहर के करीब 30-35 लोगों को पट्टे दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी की है। पुलिस ने आरोपियों के पास से कई फर्जी पट्टे, लैपटॉप और अन्य सामग्री जब्त की है। आरोपित राजू खराड़ी के खिलाफ पूर्व में भी वर्ष 2004, 2007 और 2012 में कोतवाली डूंगरपुर एवं खेरवाड़ा थाने में विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज हैं। पुलिस ने तीनों आरोपिताें को न्यायालय में पेश किया जहाँ से पीसी रिमांड प्राप्त कर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी के अन्य मामलों का खुलासा होने की पूरी संभावना है। साथ ही नगर परिषद में अन्य लोगों द्वारा प्रस्तुत पट्टों की सत्यता की भी जांच की जा रही है।