हाईकोर्ट ने मुत्तलिव की हत्या या गुमशुदगी मामले में सीबीआई को सौंपी जांच, तीन हफ्ते में मांगी प्रगति रिपोर्ट

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प्रयागराज, 01 सितंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मुजफ्फरनगर के हिस्ट्रीशीटर मुत्तलिव की गुमशुदगी के मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताई।

याची मुत्तलिव के खिलाफ मुजफ्फरनगर के विभिन्न थानों में करीब तीस मामले दर्ज हैं। हाईकोर्ट के 17 दिसंबर 2025 के जमानत आदेश के बाद 4 मई 2026 को उसे रिहा किया गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, रिहाई के तुरंत बाद थाना पुरकाजीपुर की पुलिस ने मुत्तलिव और उसके पिता को हिरासत में ले लिया। पिता को 7 मई 2026 को छोड़ दिया गया, लेकिन मुत्तलिव तभी से लापता है। उसके भाई आलम ने यह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की।

राज्य सरकार का कहना है कि मुत्तलिव के खिलाफ सत्र परीक्षण संख्या 1344/2012 में गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था और पुलिस उसकी तलाश में थी। वारंट जारी होने की तारीख को लेकर भी विरोधाभास सामने आया । पहले 13 मई 2026 बताई गई, बाद में रिकॉर्ड में 18 जून 2026 दर्शाई गई।

सुनवाई के दौरान थाना पुरकाजीपुर के एसएचओ डॉ. मानवेंद्र सिंह भाटी व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। कोर्ट ने पाया कि 15 अगस्त 2026 को गठित विशेष टीम केवल बस स्टैंड और सरकारी दफ्तरों जैसी सार्वजनिक जगहों पर मुत्तलिव की तस्वीर चस्पा करने तक सीमित रही। कोर्ट के पूछने पर पता चला कि न तो मुत्तलिव के परिजनों, पड़ोसियों और दोस्तों के बयान दर्ज किए गए, न ही किसी ने उसे 4 मई 2026 के बाद देखे होने की पुष्टि की।

उच्च न्यायालय ने कहा कि यह रवैया दिखाता है कि पुलिस गंभीरता से जांच नहीं कर रही, बल्कि मामले को लंबा खींच रही है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि रिकॉर्ड में एक प्रविष्टि को काटकर बदले जाने (छेड़छाड़) की बात एसएचओ ने अपने हलफनामे में स्वीकार की है, जिसे संबंधित कांस्टेबल की “लापरवाही” बताया गया । लेकिन उस लापरवाह कांस्टेबल के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उच्च न्यायालय ने कहा कि याची मुत्तलिव के गायब होने के दो ही कारण हो सकते हैं या तो उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि के चलते पुलिस ने उसे मार डाला, या वह खुद कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए छिपा हुआ है। दोनों ही स्थितियों में सच्चाई सामने आना ज़रूरी है।

इस पर न्यायालय ने सीबीआई को केस डायरी लेकर जांच शुरू करने का निर्देश दिया और तीन हफ्तों में प्रारंभिक रिपोर्ट पेश करने को कहा। एसएसपी मुजफ्फरनगर को भी आदेश की प्रति भेजी जाएगी ताकि जिला प्रशासन सीबीआई को पूरा सहयोग दे। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को नियत की है।